
(डॉ. सीमा दाधीच प्रधान संपादक दिव्यराष्ट्र)
आज 26 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल नवमी के पावन अवसर पर पूरा देश और विश्व भर के राम भक्त रामनवमी का उत्सव मना रहे है।इसी के साथ दिव्यराष्ट्र समाचार पत्र भी अपना स्थापना दिवस मना रहा है। इस समाचार पत्र ने आपके स्नेह एवं सहयोग सेग्यारह वर्ष की प्रकाशन यात्रा पूर्ण कर रामनवमी के दिन 12वें वर्ष में प्रवेश कर लिया दो दशक की प्रकाशन यात्रा ने हमे कई संघर्ष चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा दी है।जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के बारहव वर्ष वनवास में रहकर संघर्ष का रास्ता अपनाया उसी प्रकार की चुनौतियां इस अवधि में हमारे साथ भी रही लेकिन सभी चुनौतियों को हमने भी आपके सहयोगसे पूर्ण किया यानी हमारे शुभचिंतक , पाठक, सहयोगी हमें महाबली हनुमान की जैसे हमारे साथ खड़े रहे।
भगवान श्रीराम विष्णु जी के सातवें अवतार माने जाते हैं। वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं क्योंकि उन्होंने जीवन के हर पड़ाव में मर्यादा का पालन किया। राजकुमार होते हुए भी उन्होंने पिता के वचन को निभाने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ उन्होंने वन में कष्ट सहे, लेकिन कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। रावण जैसे शक्तिशाली राक्षस का वध कर उन्होंने अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया। दिव्यराष्ट्र समाचार पत्र भी पत्रकारिता में नैतिकता, ईमानदारी के लिए प्रयासरत रहा।
आज के युग में श्रीराम का जीवन हमें कई प्रेरणा देता है। सबसे पहली शिक्षा कर्तव्यनिष्ठानकी है। श्रीराम ने कभी कर्तव्य से मुंह नहीं मोड़ा। राजसिंहासन छोड़कर वन जाना, पिता की आज्ञा मानना – यह सब दर्शाता है कि सच्चा राजा या व्यक्ति वही है जो अपना कर्तव्य सबसे ऊपर रखता है। आज हम देखते हैं कि कई लोग व्यक्तिगत लाभ के लिए कर्तव्य भूल जाते हैं। रामनवमी हमें याद दिलाती है – कर्तव्य पालन से ही सच्ची सफलता मिलती है।
दूसरा महत्वपूर्ण गुण है धैर्य और त्याग। वनवास के दौरान श्रीराम ने न केवल कष्ट सहे बल्कि परिवार की खुशी के लिए सब कुछ त्याग दिया। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम छोटी-छोटी बातों पर घबराते हैं। राम जी का उदाहरण सिखाता है कि धैर्य रखकर और त्याग की भावना से आगे बढ़ें तो कोई भी चुनौती पार की जा सकती है।
तीसरा सबक है सत्य और न्याय। श्रीराम ने हमेशा सत्य का साथ दिया। चाहे वह वनवास हो या सीता माता का अग्निपरीक्षा जैसा कठिन निर्णय, उन्होंने कभी अन्याय नहीं किया। वर्तमान समय में जब समाज में असत्य और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, राम जी के आदर्श हमें प्रेरित करते हैं कि सत्य का मार्ग कभी आसान नहीं होता, लेकिन अंत में वही विजयी होता है।
चौथा गुण है करुणा और समभाव। श्रीराम ने शबरी के बेर खाए, केवट को गले लगाया और यहां तक कि रावण के भाई विभीषण को भी आश्रय दिया। वे सभी के लिए समान थे – अमीर-गरीब, ऊंच-नीच में कोई भेद नहीं। आज जब विभेद और घृणा फैल रही है, राम जी की करुणा हमें सिखाती है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
रामनवमी का उत्सव केवल पूजा-पाठ या व्रत तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमें इसे अवसर बनाना चाहिए अपने जीवन में राम के गुणों को उतारने का। घर-घर में रामायण पढ़ें, बच्चों को राम के चरित्र की कहानियां सुनाएं ताकि नई पीढ़ी सच्चे मूल्यों के साथ बड़े। युवाओं को प्रेरित करें कि सफलता केवल धन से नहीं, बल्कि चरित्र से आती है।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर आज पूरे विश्व को राम की शक्ति का प्रतीक बता रहा है। लेकिन असली मंदिर तो हमारे हृदय में होना चाहिए जहां राम विराजमान हों। जब हर व्यक्ति अपने अंदर राम को बसाएगा, तभी समाज में सुख-शांति आएगी।
रामनवमी के इस पावन पर्व पर हम सभी संकल्प लें कि हम सत्य बोलेंगे, कर्तव्य निभाएंगे, त्याग करेंगे और करुणा बिखेरेंगे।
यह त्योहार न केवल भक्ति का प्रतीक है बल्कि मानव जीवन के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक भी है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति अपने मूल्यों को बनाए रख सकता है।
राम जी का चरित्र बहुआयामी है। वे पुत्र के रूप में कर्तव्यनिष्ठ, पति के रूप में वफादार, भाई के रूप में प्रेमी और राजा के रूप में न्यायप्रिय थे। वनवास स्वीकार कर उन्होंने दिखाया कि वचन की मर्यादा सबसे ऊपर है। रावण वध कर उन्होंने साबित किया कि अधर्म कभी टिक नहीं सकता।
आधुनिक भारत में राम के आदर्शों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। युवा पीढ़ी को राम से सीखनी चाहिए कि धैर्य और संयम से बड़ी ताकत कोई नहीं। महिलाओं के सम्मान के मामले में राम और सीता का संबंध आदर्श है सामाजिक सद्भाव के लिए राम की करुणा हमें प्रेरित करती है।
सरकारें, नेता और आम नागरिक सभी को राम के मार्ग पर चलना चाहिए। भ्रष्टाचार मुक्त, न्यायपूर्ण और समृद्ध भारत का सपना राम राज्य से प्रेरित है। रामनवमी पर हम न केवल दीप जलाएं बल्कि अपने अंदर की अंधकार को भी दूर करें।
आइए, इस रामनवमी हम वचन दें हम राम बनेंगे, राम की तरह जिएंगे। साथ ही हम यह भी संकल्प लेते है कि दिव्यराष्ट्र समाचार पत्र लोकतंत्र की रक्षा के साथ ही आम जन की आवाज उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।




