दिव्यराष्ट्र, मीरपुर: राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित 1300 वर्ष प्राचीन श्री हमीरपुरा पार्श्वनाथ जैन तीर्थ में अनूठे चातुर्मास का आयोजन किया गया है, जिसमें ध्यान साधना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। चातुर्मास में भाग लेने वाले साधक मौन धारण कर रहे हैं और उन्होंने मोबाइल फोन का भी त्याग किया है। 50 दिवसीय ‘नीज में निवास-मीरपुर चातुर्मास द्वितीय’ का शुभारंभ 28 जुलाई को हुआ था और यह 16 सितंबर तक चलेगा।
‘नीज में निवास-सिद्धवड़ चातुर्मास’ का आयोजन पिछले वर्ष पालीताना में शत्रुंजय की तलहटी में स्थित सिद्धवड़ तीर्थ में किया गया था और इसकी इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी प्रविष्टि हुई थी। पहले चातुर्मास को मिली जबरदस्त सफलता के बाद दूसरा चातुर्मास अब पवित्र मीरपुर तीर्थ में आयोजित किया गया है। मीरपुर तीर्थ में एक समय 15 से अधिक जिनालय थे, लेकिन वर्तमान में वहां केवल चार प्राचीन जिनालय शेष हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर मीरपुर तीर्थ पर्वतों की गोद में स्थित है। तीर्थ के आसपास मोर, भालू, बंदर जैसे वन्यजीव भी स्वच्छंद रूप से विचरण करते दिखाई देते हैं। यहां का वातावरण प्रदूषणमुक्त है। यह तीर्थ नगर से इतना दूर स्थित है कि माचिस खरीदने या चाय की चुस्की लेने के लिए भी करीब 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
प्रतिदिन तड़के चार बजे शुरू होने वाली यह आराधना रात 9.30 बजे समाप्त होती है। भोजन और विश्राम के लिए साधकों को बीच में थोड़ा विराम दिया जाता है। इस द्वितीय ‘नीज में निवास-मीरपुर चातुर्मास’ का आयोजन 38 वर्षीय युवा प.पू. आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय लब्धिवल्लभसूरीश्वरजी महाराज साहेब की निश्रा में हो रहा है। वर्तमान में प्रतिदिन 300 से अधिक साधक तथा पूज्य साधु भगवंत एवं साध्वी भगवंत इस चातुर्मास की आराधना का लाभ ले रहे हैं।
प.पू. आचार्य लब्धिवल्लभसूरीश्वरजी महाराज ने कहा कि मीरपुर तीर्थ शहर की भागदौड़ से दूर आबू के पर्वतों की गोद में बसा हुआ है। यह पार्श्वचंद्रगच्छ के श्री प.पू. पार्श्वचंद्रसूरिश्वरजी की जन्मभूमि भी है। साधक चातुर्मास के दौरान आत्मिक शांति और तनावमुक्त जीवन का अनुभव कर रहे हैं। चातुर्मास में अनेक उत्सव भी मनाए जा रहे हैं तथा साधक भक्तिसंगीत में भी लीन हो रहे हैं।
चातुर्मास के दौरान दो शिविरों और नवपदजी की ओली का भी आयोजन किया जाएगा। पहला शिविर 23 से 27 सितंबर तक, जबकि दूसरा शिविर 7 से 11 अक्टूबर तक आयोजित होगा। वहीं, नवपदजी की ओली 18 से 26 अक्टूबर तक आयोजित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास में साधकों के लिए सफेद वस्त्र धारण करना अनिवार्य है। उन्हें मौन का पालन करना होता है और मोबाइल फोन का उपयोग भी नहीं कर सकते। साधकों को तात्त्विक प्रवचन एवं चिंतन का लाभ मिलेगा। इसमें भाग लेने वाले साधक स्वयं की खोज कर सकेंगे और उनकी आध्यात्मिक उन्नति होगी। इस चातुर्मास में मोक्षलक्षी श्रवण भी होगा। साधकों के लिए प्रतिदिन सुबह पौने घंटे योग एवं प्राणायाम करना अनिवार्य है। प.पू. गच्छाधिपति आचार्य विजय राजेंद्रसूरिश्वरजी महाराज के आशीर्वाद से यह भव्य चातुर्मास संपन्न हो रहा है।