
मुंबई, दिव्यराष्ट्र:/ दर्शकों को गहराई से प्रभावित करने वाली एक सशक्त थिएटर प्रस्तुति में, रुद्रा क्यारा प्रोडक्शंस एलएलपी ने अपनी अध्यक्ष शुचि सिंह के नेतृत्व में टैगोर थिएटर – मिनी ऑडिटोरियम, चंडीगढ़ में नाटक “आउट आफ फ्रेम का सफल मंचन किया। यह प्रस्तुति भावनात्मक रूप से बेहद प्रभावशाली रही और सामाजिक रूप से जागरूक कला की भावना को फिर से जीवित करती नजर आई।
करीब 1 घंटा 10 मिनट की इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और थिएटर निर्देशक अमित सनौरिया ने किया। इस नाटक में 1960 के दशक की क्लासिक फिल्म “प्यासा” की कहानी कहने की शैली से प्रेरणा दिखाई देती है। जिस तरह फिल्म का किरदार विजय समाज की सच्चाई बोलने के कारण ठुकरा दिया जाता है, उसी तरह आउट आफ फ्रेम में दर्शकों को कबीर नाम के एक विद्रोही कलाकार की कहानी दिखाई जाती है, जो समाज के पाखंड और अन्याय से समझौता करने से इनकार करता है।
नाटक में कबीर की भूमिका निभा रहे अभिनेता सुप्रीत सिंह ने अपने किरदार को 1960 के दशक के क्लासिक सिनेमा से प्रेरित एक सादगीपूर्ण और काव्यात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया है। उनके अभिनय में शांत विद्रोह, भावनात्मक गहराई और अभिव्यक्ति की ताकत साफ दिखाई देती है। यह प्रस्तुति नाटक के मुख्य विचार को और मजबूत बनाती है कि समाज अक्सर सच्चाई बोलने वालों को अस्थिर, असुविधाजनक या खतरनाक मान लेता है।
आउट आफ फ्रेम एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक ड्रामा है, जो समाज के नियमों के साथ चलने और उनके खिलाफ खड़े होने के बीच की पतली रेखा को दिखाता है। कबीर का सच्चाई से समझौता न करना उसे अपने परिवार, कला जगत और समाज से दूर कर देता है। यह कहानी उन कलाकारों की दुखद यात्रा को दर्शाती है जो सामाजिक पाखंड को चुनौती देते हैं।
नाटक में सैयद अलीम और सुचिता शर्मा की सहायक भूमिकाओं ने भी कहानी को और गहराई दी। सादगीपूर्ण मंच सज्जा, प्रतीकात्मक प्रस्तुति और प्रभावशाली लाइटिंग के माध्यम से कलाकारों के अभिनय को केंद्र में रखा गया, जो निर्देशक अमित सनौरिया की उस सोच को दर्शाता है कि थिएटर का असली उद्देश्य सच्ची और प्रभावशाली कहानी कहना है, न कि केवल भव्यता दिखाना।
थिएटर और सिनेमा में 17 वर्षों से अधिक के अनुभव रखने वाले अमित सनौरिया की इस नाटक के जरिए मंच निर्देशन में वापसी को दर्शकों ने खूब सराहा। मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा और ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया में फिल्म अध्ययन की उनकी पृष्ठभूमि इस नाटक की सिनेमाई गति और संतुलित प्रस्तुति में स्पष्ट दिखाई दी।
शाम का समापन दर्शकों की जोरदार तालियों और गहरे विचारों के साथ हुआ। आउट आफ फ्रेम ने दर्शकों को समाज में हो रहे अन्याय के प्रति अपनी चुप्पी पर सोचने के लिए प्रेरित किया।
क्लासिक सिनेमा की आत्मा और आज की सामाजिक वास्तविकताओं को मिलाकर आउट आफ फ्रेम केवल एक सफल नाट्य प्रस्तुति ही नहीं, बल्कि यह याद दिलाने वाली कृति भी है कि सच्ची कला हर दौर में समाज को सवाल करने के लिए मजबूर करती है। रुद्रा क्यारा प्रोडक्शंस एलएलपी की अध्यक्ष शुचि सिंह के मार्गदर्शन में यह प्रस्तुति सार्थक और सामाजिक रूप से प्रासंगिक थिएटर के प्रति संस्था की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।




