मुंबई, दिव्यराष्ट्र/ गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने और मानसून शुरू होने के साथ ही बच्चों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे ‘स्कूल रीओपनिंग इफेक्ट’ कहते हैं, जिसमें लंबे अवकाश के बाद बच्चे बड़ी संख्या में एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं और वायरस व बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं।
डॉ. नेहल शाह, कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक मेडिसिन, नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, मुंबई के अनुसार, छुट्टियों के दौरान बच्चे सीमित लोगों के संपर्क में रहते हैं, लेकिन स्कूल खुलते ही कक्षाओं, खेल सामग्री और साझा वस्तुओं के माध्यम से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। मानसून का नम मौसम भी वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल होता है।
इस दौरान सर्दी-खांसी, वायरल बुखार, फ्लू, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन संक्रमण आम हो जाते हैं। वहीं, दूषित भोजन और पानी से पेट संबंधी संक्रमण तथा जलभराव के कारण डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है।
डॉ. नेहल शाह, कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक मेडिसिन, नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, मुंबई का कहना है कि कुछ सरल सावधानियां बच्चों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती हैं। बच्चों को नियमित रूप से कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोने, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढंकने तथा बीमार होने पर स्कूल न भेजने की आदत डालनी चाहिए। स्कूलों में साफ पेयजल, स्वच्छ शौचालय और साझा स्थानों की नियमित सफाई भी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि संतुलित आहार, मौसमी फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त नींद और समय पर टीकाकरण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखते हैं। यदि बच्चे को लगातार बुखार, सांस लेने में तकलीफ या लंबे समय तक पेट दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।