राजस्थान बाल साहित्य अकादमी के सचिव रहे साहित्यकार राजेन्द्र मोहन शर्मा का जन्म 28 सितम्बर 1954 को पिता प. प्यारे मोहन शर्मा एवं माता स्व सावित्री देवी के परिवार में जयपुर में हुआ। पौराणिक उपन्यासों को आधुनिक आनुक्रम से प्रस्तुत करने वाले देश के शीर्ष पौराणिक उपन्यासों के रचनाकारो में गिना जाता है। देश भर में विनायक सहस्त्र सिद्धे अर्थात गणेश जी पर लिखा गया पहले उपन्यास को देशभर के विद्वानों और साहित्कारों ने बेजोड़ उपन्यास घोषित किया है । एमए., एमएड.
,एलएल.बी.,साहित्यरत्न की शिक्षा प्राप्त की। हिन्दी, अंग्रेजी भाषाओं का ज्ञान रखने वाले गद्य – पद्य विधाओं में कहानी, कविता, व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर लगातार लिखते हैं। देश भर की प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओं में रचनाएं लंबे समय से निरंतर प्रकाशित एवं आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारित हो रही हैं।
प्रकाशित कृतियों में विनायक सहस्त्र सिद्धे , महात्मा विदुर,सुदेव शुक, महामना मार्कण्डेय, उर्मि के लखन, हारे का सहारा खाटू श्याम हमारा, नीले सपने सहित 18 उपन्यास सहित व्यंग्य संग्रह , कहानी संग्रह, कविता संग्रह और समसामयिक विषयों का आलेख संग्रह ,जयपुर का इतिहास आदि पर 200 से अधिक साहित्यिक कृतियांप्रकाशित हो चुकी हैं । संपादन : राजस्थान के शिक्षा विभाग से प्रकाशित आखर जोत एवं शिविरा जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं का 5 वर्ष तक संपादन किया है । आपका व्यंग संग्रह टेडी बत्तीसी देशभर में बहुचर्चित कृति रही । कविता के क्षेत्र में आपकी पुस्तक आखिर क्यों को राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है । समसामयिक विषयों सहित कहानी संग्रह गंगाराम तथा रंजना की व्यंजना आपका व्यंग्य संग्रह आदि भी आप की चर्चित पुस्तकें हैं ।
साहित्यिक सृजन के लिए देश – विदेश की विभिन्न संस्थाओं द्वारा 100 से अधिक पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।सर्वोच्च पुरस्कार भारत नेपाल साहित्य रत्न ( नेपाल और भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से ), मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी भोपाल से अखिल भारतीय उपन्यास पुरस्कार तथा भूटान से साहित्य शिरोमणि पुरस्कार महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुए हैं।