दिव्यराष्ट्र, जयपुर: भारत ने सदियों से प्राचीन धरोहरों और ऐतिहासिक स्मारकों के महत्व को समझा है। हम्पी, अजंता और वाराणसी के घाटों जैसी अमूल्य विरासत का निर्माण करने वाली सभ्यता भली-भांति जानती है कि कुछ स्थानों की दीवारों में ही इतिहास जीवंत होता है। विरासत के प्रति यही साझा दृष्टिकोण तुर्किये को भारतीय यात्रियों के लिए एक स्वाभाविक और आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाता है।
इसी सोच के साथ तुर्किये भारत के इतिहास प्रेमियों, पुरातत्व के प्रति उत्साही लोगों और सांस्कृतिक अनुभवों की तलाश करने वाले यात्रियों को ऐसे देश की खोज के लिए आमंत्रित कर रहा है, जहां यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल 22 स्थल मौजूद हैं। इनमें बर्फ-सी सफेद थर्मल पठार, ज्वालामुखीय चट्टानों से बनी परी-कथा जैसी घाटियां, और प्राचीन विश्व के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह नगरों में से एक जैसी विविध प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरें शामिल हैं। 2025 तक, तुर्किये में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल 22 स्थल हैं, जिनमें 20 सांस्कृतिक और 2 मिश्रित श्रेणी के हैं। ‘मिश्रित’ श्रेणी का अर्थ है कि ये स्थल अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक—दोनों ही दृष्टियों से असाधारण महत्व रखते हैं। इसके अलावा, 79 अन्य स्थल यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हैं, जो भविष्य में विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि यदि कोई यात्री तुर्किये में केवल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की यात्रा के लिए पूरा एक सप्ताह भी बिताए, तब भी वह इस देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का पूरा अनुभव नहीं कर पाएगा।
यात्रा की शुरुआत कहां से करें: तुर्किये के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में से कुछ प्रमुख स्थल गोबेकलितेपे, शानलिउर्फा — जहां मानव इतिहास की नई व्याख्या हुई लगभग 12,000 वर्ष पुराना गोबेकलितेपे (Göbeklitepe), स्टोनहेंज से करीब 6,000 वर्ष और मिस्र के पिरामिडों से लगभग 7,000 वर्ष अधिक प्राचीन है। ऊपरी मेसोपोटामिया में स्थित इस विशाल पुरातात्विक स्थल की खोज ने प्रारंभिक मानव सभ्यता के बारे में पुरातत्वविदों की स्थापित धारणाओं को बदल दिया।
इस खोज से पता चला कि शिकारी-संग्रहकर्ता समुदाय कृषि की शुरुआत से बहुत पहले ही विशाल स्मारकीय संरचनाओं का निर्माण कर रहे थे। हाल के उत्खननों से यह भी सामने आया है कि यहां के नवपाषाण काल (Neolithic) के लोगों को ज्यामिति का उन्नत ज्ञान प्राप्त था। जो यात्री मानव सभ्यता की सबसे शुरुआती कहानी को उसके मूल स्थान पर जाकर महसूस करना चाहते हैं, उनके लिए गोबेकलितेपे से बेहतर और अधिक प्राचीन, आज भी सुलभ कोई दूसरा स्थल दुनिया में उपलब्ध नहीं है।