एमआईटी-डब्ल्यूपीयू दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आर्लेकर का उद्बोधन
पुणे, दिव्य राष्ट्र। एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह में भविष्य के भारत की तस्वीर, युवा शक्ति और नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि जब शिक्षा चरित्र निर्माण करती है, तब राष्ट्र निर्माण अपने आप संभव हो जाता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनका ज्ञान, कौशल और अनुभव केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान देना चाहिए। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।
दीक्षांत समारोह का मुख्य आकर्षण 7,806 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान किया जाना रहा। इनमें 17 पीएचडी शोधार्थी भी शामिल थे। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 345 विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। धनश्री राजेंद्र म्हसे को ‘फाउंडर प्रेसिडेंट मेडल’ प्रदान किया गया।
समारोह के दूसरे दिन भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति उदय ललित ने विद्यार्थियों से ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और उत्कृष्टता के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। वहीं डॉ. अशोक खेमका ने कहा कि डिग्री जिम्मेदारियों की शुरुआत है, जबकि प्रो. डॉ. सतीश के. त्रिपाठी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग पर बल दिया।
विश्वविद्यालय के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल वी. कराड ने विद्यार्थियों से समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए विज्ञान, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों के समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।