
जयपुर, दिव्यराष्ट्र/ नोवो नॉर्डिस्क इंडिया ने टाइप 2 मधुमेह और मोटापे या अधिक वजन से जूझ रहे लोगों के लिए अपनी भरोसेमंद सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन की कीमतों में कमी की घोषणा की। 1 अप्रैल 2026 से, भारत में ओज़ेम्पिक की शुरुआती खुराक की कीमत में 36प्रतिशत और वेगोवी की शुरुआती खुराक की कीमत में 48प्रतिशत की कमी की जाएगी। ओज़ेम्पिक (0.25 एमजी) और वेगोवी (0.25 एमजी) अब 202 रुपये प्रतिदिन या 1,415 रुपये प्रति सप्ताह (टैक्स सहित) की कीमत पर उपलब्ध होंगे।इसका उद्देश्य इन आधुनिक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाओं को भारत में मधुमेह और मोटापे से जूझ रहे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है, ताकि उन्हें सुरक्षित, प्रभावी और भरोसेमंद इलाज आसानी से मिल सके।
इस बारे में बोलते हुए नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रांत श्रोत्रिया ने कहा हम विज्ञान से प्रेरित हैं, लेकिन हमारा ध्यान हमेशा मरीजों पर रहता है। अपने नवाचारी उपचारों की कीमतों में बदलाव करके हम कोशिश कर रहे हैं कि भारत में टाइप 2 मधुमेह, अधिक वजन और मोटापे से जूझ रहे ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए बेहतर स्तर की कार्डियोमेटाबोलिक देखभाल सस्ती और सुलभ हो सके। हमने मरीजों और डॉक्टरों की बात सुनी है और उसी के आधार पर यह कदम उठाया है। भारत में मधुमेह, मोटापा और उनसे जुड़ी समस्याओं का बोझ बहुत ज्यादा है, और हम सुरक्षित, प्रभावी और भरोसेमंद समाधानों के जरिए इसे कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
ओज़ेम्पिक एक ऐसी जीएलपी-1 आरए दवा है, जो टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों के लिए कई तरह के फायदे देती है। यह ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने, प्रभावी रूप से वजन घटाने और टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में दिल और किडनी से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद करती है।वहीं, वेगोवी अधिक वजन या मोटापे से जूझ रहे लोगों में सुरक्षित और लंबे समय तक टिकने वाला वजन कम करने में मदद करती है और दिल से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को भी कम करती है। ये दोनों दवाएं खान-पान और व्यायाम के साथ सहायक रूप में दी जाती हैं और केवल डॉक्टर की सलाह पर ही इस्तेमाल की जानी चाहिए। इन्हें हमेशा स्वास्थ्य विशेषज्ञ की निगरानी में ही लेना चाहिए।
नोवो नॉर्डिस्क की सेमाग्लूटाइड, जो वेगोवी और ओज़ेम्पिक में इस्तेमाल होने वाला सक्रिय दवा घटक है, 50 से अधिक क्लिनिकल ट्रायल, 49 मिलियन मरीज-वर्ष के उपयोग और वास्तविक जीवन के व्यापक प्रमाणों से समर्थित है1।ये दोनों दवाएं आरडीएनए तकनीक से बनाई जाती हैं, सुरक्षित और मानक-स्वीकृत पेन डिवाइस में उपलब्ध हैं और पूरे देश में मजबूत कोल्ड चेन प्रणाली के तहत वितरित की जाती हैं। मरीजों के लिए इसका मतलब है कि यह एक ऐसा इलाज है जिसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता अच्छी तरह से स्थापित और भरोसेमंद है।इंजेक्शन के रूप में दी जाने वाली सेमाग्लूटाइड को भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (डीसीजीआई), यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (ईएमए), यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएस एफडीए) और जापान की फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज एजेंसी (पीएमडीए) सहित 75 देशों के नियामक प्राधिकरणों से मंजूरी मिली है।




