दिव्यराष्ट्र, जयपुर: एनसीडीईएक्स ने अपने ‘इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड ट्रस्ट’ (आईपीएफटी) के तहत, ‘इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ सिक्योरिटीज कमीशंस’ (आईओएससीओ) के ‘वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक 2026’ के मौके पर जयपुर में ‘इन्वेस्टर अवेयरनेस वर्कशॉप’ (निवेशक जागरूकता कार्यशाला) आयोजित की। इन सेशन में लोगों को डिजिटल स्कैम, अफ़वाहों और पक्के रिटर्न के वादों को पहचानने में मदद मिली और उन्हें सुरक्षित निवेश के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसके बारे में बताया गया। वर्कशॉप में राजस्थान के कमोडिटी ट्रेड का उदाहरण देकर यह भी समझाया गया कि एक रेगुलेटेड और पारदर्शी बाज़ार कैसे काम करता है।
‘वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक’ निवेशकों की शिक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ सिक्योरिटीज कमीशंस’ (आईओएससीओ) की एक वैश्विक पहल है। इस साल इसके मुख्य विषय हैं – निवेशकों की मज़बूती (Investor Resilience), डिजिटल धोखाधड़ी और स्कैम अलर्ट। यह वर्कशॉप ‘वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक 2026’ के लिए एनसीडीईएक्स आईपीएफटी की अपनी पहल है।
वर्कशॉप के मकसद के बारे में बताते हुए एनसीडीईएक्स के चीफ बिज़नेस ऑफिसर, श्री केदार देशपांडे ने कहा,“निवेशकों की सुरक्षा जागरूकता से शुरू होती है। जैसे-जैसे रेगुलेटेड मार्केट में लोगों की भागीदारी बढ़ रही है, निवेशकों को जानकारी रखनी चाहिए, सही सवाल पूछने चाहिए और ऐसे ऑफ़र से बचना चाहिए जो सच होने के लिए बहुत अच्छे लगते हों। काउंटरपार्टी की जांच करना, कॉन्ट्रैक्ट नोट लेना और पक्के रिटर्न वाली स्कीम से दूर रहना – ये कुछ आसान कदम हैं जिनसे बचत को सुरक्षित रखा जा सकता है। ‘वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक‘ के दौरान इस बातचीत को आगे बढ़ाकर, हमारा मकसद निवेशकों और किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाना है ताकि वे ज़्यादा भरोसे और सुरक्षा के साथ मार्केट में हिस्सा ले सकें।”
सेशन की मुख्य बातें:
- स्कैम पक्के तौर पर कुछ होने का वादा करते हैं; बाज़ार कभी ऐसा नहीं कर सकते।पक्का रिटर्न, हॉट टिप्स और अफ़वाहें—जिनमें सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के ज़रिए मिलने वाली जानकारी भी शामिल है—धोखाधड़ी के आम संकेत हैं।
- भरोसा करने से पहले पुष्टि कर लें।सिर्फ़ एक्सचेंज में रजिस्टर्ड सदस्यों के साथ ही लेन-देन करें; इनकी लिस्ट एक्सचेंज की वेबसाइट पर उपलब्ध है। बिना अधिकार वाले बिचौलियों के ज़रिए या ऑफ़-मार्केट डील करने पर निवेशक एक्सचेंज की सुरक्षा के दायरे से बाहर हो जाते हैं।
- कागज़ी कार्रवाई सुरक्षा है।साइन किया हुआ कॉन्ट्रैक्ट नोट, रिस्क डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट और अकाउंट स्टेटमेंट की नियमित जांच से निवेशकों को गड़बड़ियों का जल्द पता लगाने में मदद मिलती है, और एक्सचेंज की वेबसाइट पर ट्रेड की क्रॉस-चेकिंग भी की जा सकती है।
- प्राइस प्रोटेक्शन मुनाफ़े का वादा नहीं है।एक्सचेंज टूल्स किसानों और व्यवसायों को कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद करते हैं। इनका मकसद जोखिम को मैनेज करना है, न कि जल्दी मुनाफा कमाना।
- एक रेगुलेटेड मार्केट अपने पीछे निशान छोड़ता है।राजस्थान में कमोडिटी का व्यापार—जैसे जोधपुर में ग्वार बीज और बीकानेर में मूंगफली—यह दिखाता है कि रेगुलेटेड ट्रेडिंग कैसे काम करती है: रजिस्टर्ड सदस्य, कॉन्ट्रैक्ट नोट, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और मान्यता प्राप्त वेयरहाउस हर ट्रेड को ट्रैक करने लायक बनाते हैं, जो ‘डब्बा’ और ‘ऑफ-मार्केट’ डील्स से बिल्कुल अलग है।
निवेशकों के लिए क्या करें और क्या न करें:
क्या करें:
- सिर्फ़ एक्सचेंज-रजिस्टर्ड सदस्यों के ज़रिए ही ट्रेड करें और एक्सचेंज की वेबसाइट पर उनका रजिस्ट्रेशन चेक करें।
- हर ट्रेड के लिए साइन किए हुए कॉन्ट्रैक्ट नोट और रिस्क डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट पर ज़ोर दें।
- अपने स्टेटमेंट का नियमित रूप से मिलान करें और किसी भी अंतर के बारे में तुरंत बताएं।
- मार्जिन और मार्क-टू-मार्केट देनदारियों का भुगतान समय पर करें।
क्या न करें:
- अफ़वाहों, हॉट टिप्स या पक्के रिटर्न के वादों पर अमल न करें, चाहे उनका सोर्स या प्लेटफ़ॉर्म कितना भी भरोसेमंद क्यों न लगे।
- बिना रजिस्ट्रेशन वाले मध्यस्थों के साथ या ऑफ़-मार्केट लेन-देन में काम करना।
- डब्बा ट्रेडिंग में शामिल हो जाएं।
- जोखिमों को अपनी सहन-शक्ति से अधिक बढ़ने दें।