मुंबई, दिव्यराष्ट्र:/ राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) तथा राष्ट्रीय अवसंरचना वित्तपोषण एवं विकास बैंक (नाबफीड) ने ग्रामीण प्रभाव वाली अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस साझेदारी के तहत नाबार्ड की ग्रामीण एवं कृषि अवसंरचना संबंधी विशेषज्ञता और नाबफीड की अवसंरचना वित्तपोषण क्षमता को एक मंच पर लाया जाएगा। समझौते का उद्देश्य संयुक्त वित्तपोषण, ज्ञान साझाकरण और नवाचारी वित्तीय समाधान विकसित करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक और प्रतिस्पर्धी दरों पर वित्त उपलब्ध कराया जा सके।
एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम में नाबफीड़ की उप प्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी मोनिका कालिया , नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक गोवर्धन एस। रावत तथा डॉ . अजय के सूद सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ . शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि यह साझेदारी ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करने, मूल्य श्रृंखला वित्तपोषण को बढ़ावा देने और ग्रामीण समृद्धि को गति देने में सहायक होगी। वहीं नाबफीड के प्रबंध निदेशक राजकीरण राय ने कहा कि ग्रामीण अवसंरचना आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन रही है और दोनों संस्थानों का सहयोग खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण तथा कोल्ड-चेन जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा।
समझौते के तहत दोनों संस्थान परियोजनाओं की पहचान, मूल्यांकन, ऋण संरचना, वित्तीय मॉडलिंग, ऋण सिंडिकेशन और संयुक्त निगरानी जैसे क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। इसके अलावा क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
साझेदारी का दायरा* सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं, कृषि मूल्य श्रृंखलाओं, जल एवं स्वच्छता, सिंचाई, कोल्ड-चेन, ग्रामीण सड़क एवं पुल, गोदामों तथा संपीड़ित बायोगैस जैसे क्षेत्रों तक विस्तृत होगा। इन क्षेत्रों को ग्रामीण अवसंरचना को मजबूत करने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
दोनों संस्थानों का मानना है कि यह पहल ग्रामीण अवसंरचना परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त की उपलब्धता बढ़ाने, बाजार पहुंच को मजबूत करने तथा ग्रामीण आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।