
जयपुर, दिव्य राष्ट्र/ जीवन में अपना लक्ष्य स्वयं की क्षमता से अधिक बनाओगे, तभी मजबूत बन पाओगे। आप अपने प्रथम प्रयास में वह करो, जो आपको सबसे मुश्किल लगे। यदि यह लक्ष्य तय हो जाएगा तो दूसरे नए लक्ष्य बनेंगे। यह कहना था लेखक, विचारक व प्रेरक मुकुल कानिटकर का। वे मंगलवार को पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में युवा संवाद ‘जागो वीर-शक्ति पहचानो’ के जरिए स्टूडेंट्स से रूबरू हुए। राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य, युवा मामले एवं खेल विभाग के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने उनसे चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत में राजस्थान सरकार के युवा मामले एवं खेल विभाग के शासन सचिव डॉ. नीरज के. पवन (आईएएस) और पूर्णिमा ग्रुप के चेयरमेन शशिकांत सिंघी ने अतिथियों का स्वागत किया।
मुकुल कानिटकर ने युवाओं को मोटिवेट करते हुए कहा कि यदि आप असंभव सपने देखते हो तो ही आप युवा हो। जो स्वयं को चुनौती देकर अपने कंफर्ट जोन को तोड़ता है, वहीं वीर है, वीरता एटीट्यूड है। आप स्वयं को पहचानो, रोजाना सोने से पहले स्वयं से सवाल करो कि आज क्या नया सीखा, क्या नया किया, आपके जीवन का लक्ष्य क्या है। आपको जिंदगी में किसी मोटिव को चुनना ही होगा।
कानिटकर ने अपनी पुस्तक ‘परीक्षा दे हंसते—हंसते’ के हवाले से बताया कि प्रतिस्पर्धा में दूसरे के साथ मुकाबला होता है। जीवन में कुछ हासिल करना है तो स्वयं से ‘अनुस्पर्धा’ करो। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्टूडेंट यदि देश के लिए योगदान देना चाहते हैं तो केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि बड़ी इकाई- देश के लिए पढ़ें। शकुनी व हिटलर ने स्वयं के लिए गलत लक्ष्य बनाया, लेकिन कृष्ण ने स्वयं के लिए नहीं, समाज के लिए व्यूह रचना की। छात्र जीवन प्रयोग करने का समय होता है, कॉलेज लाइफ आपके लिए महान अवसर है, अपने स्वभाव के अनुसार यह पहचानो कि आप राष्ट्र व मानवता के लिए किस माध्यम से सर्वाधिक योगदान दे सकते हो और एसी दिशा में आगे बढ़ो।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद की कही बात ‘नेतृत्व वही कर सकता है, जिसके पास कृतत्व हो’ का उदाहरण देते हुए कहा कि आप कल्याण के लिए कार्य करना शुरू करो, लोग आपको लीडर बना देंगे। 21 जून 2015 के दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत के साथ ही भारत माता विश्व गुरु बना गई थी, जब 193 देशों के लोगों ने एक साथ योग किया। कानिटकर ने कहा कि भाई-भाई में लड़ाई बड़ी बात नहीं है, यह बढ़ नहीं रही है, बल्कि इसे ज्यादा दिखाया जा रहा है। परिवार टूट नहीं रहे है, फैल रहे हैं। नकारात्मकता को मत बढ़ाओ। परिवार को आगे बढ़ाने के लिए भाई कई बड़े त्याग करते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद व महात्मा गांधी के आदर्शों के बारे में बताते हुए उनसे सीख लेने की अपील की।
कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि युवा सिर्फ भविष्य नहीं है, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति है। जीवन में समय हमेशा बदलता रहेगा, आप स्वयं व राष्ट्र में हमेशा वैल्यू एडिशन करते रहें। अंत में पूर्णिमा ग्रुप के डायरेक्टर राहुल सिंघी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया।





