
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पूर्व एक भावनात्मक और प्रेरणादायी आयोजन में जयपुर रग्स फाउंडेशन ने अनंतारा ज्वेल बाग जयपुर के सहयोग से उन महिला कारीगरों का विशेष सम्मान किया, जिनकी जीवन यात्राएँ साहस, सृजनशीलता और आत्म-परिवर्तन का सशक्त प्रतीक हैं।
अनंतारा ज्वेल बाग जयपुर के भव्य रंग महल हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में सीकर जिले के आसपुरा और जयपुर जिले के धानोटा से आई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित महिला कारीगरों ने भाग लिया। यह दोपहर उनके विकास की कहानी को समर्पित रही—जहाँ वे जमीनी स्तर की बुनकरों से आत्मविश्वासी कलाकारों में परिवर्तित होकर अपनी कला के माध्यम से वैश्विक मंच पर पहचान बना रही हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत “पहचान” फिल्म के प्रदर्शन से हुई, जो जयपुर रग्स कारीगर समुदाय की आत्म-खोज और पहचान की भावना को दर्शाती है। इस फिल्म ने पूरे आयोजन की संवेदनशील और सार्थक पृष्ठभूमि तैयार की। इसके बाद महिला कारीगरों ने कविता और व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से अपनी जीवन यात्राएँ साझा कीं।
भावुक क्षणों में कारीगरों ने सामाजिक अदृश्यता से आर्थिक आत्मनिर्भरता तक की अपनी यात्रा को साझा किया। अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक का उनका सफर साक्षरता, आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। आज ये महिलाएँ अपने परिवारों और समुदायों में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर सहयोगी हैं—जो शिल्प के माध्यम से एक शांत किंतु गहन सामाजिक परिवर्तन का नेतृत्व कर रही हैं।
अतिथियों को इस परिवर्तन की प्रक्रिया को नज़दीक से समझने का अवसर भी मिला। टफ्टिंग कार्यशालाओं और ऊन एवं पोस्टकार्ड से जुड़ी इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने हस्तनिर्मित कालीनों में निहित धैर्य, सूक्ष्मता और सृजनात्मक स्वतंत्रता को अनुभव किया।
जयपुर रग्स फाउंडेशन की महिला सशक्तिकरण के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पूरे आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इसके संस्थापक नंद किशोर चौधरी के मार्गदर्शन में फाउंडेशन ने ग्रामीण भारत की हजारों महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका प्रदान करते हुए पारंपरिक बुनाई तकनीकों के संरक्षण का कार्य किया है। बुनकर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कलाकार बनने तक की उनकी यात्रा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित समावेशी विकास का सशक्त उदाहरण है।
जयपुर रग्स फाउंडेशन और अनंतारा ज्वेल बाग जयपुर के वरिष्ठ प्रतिनिधियों सहित विशिष्ट अतिथि इस विशेष अवसर के साक्षी बने और इन असाधारण कहानियों का सम्मान किया।
यह आयोजन केवल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या भर नहीं था, बल्कि यह सुनने, पहचान देने और साझा मानवता को स्वीकार करने का एक मंच बना—यह संदेश देते हुए कि सच्चा उत्सव उन आवाज़ों को सम्मान देने से शुरू होता है, जो कभी अनसुनी थीं।
जयपुर रग्स फाउंडेशन के बारे में*
जयपुर रग्स फाउंडेशन, जयपुर रग्स की सामाजिक प्रभाव शाखा है। जयपुर रग्स एक अग्रणी वैश्विक सामाजिक उद्यम है, जिसकी स्थापना वर्ष 1978 में नन्द किशोर चौधरी द्वारा की गई थी, जिन्हें “कार्पेट उद्योग के गांधी” के नाम से जाना जाता है।
दो करघों और नौ कारीगरों से शुरू हुई यह पहल आज एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुकी है, जो 600 से अधिक दूरस्थ गाँवों में 40,000 से अधिक कारीगरों को भारत के पाँच राज्यों से जोड़ते हुए 60 से अधिक देशों के बाज़ारों तक पहुँचाती है।
इस यात्रा के केंद्र में एक सरल किंतु शक्तिशाली विश्वास है—सम्मान, निष्पक्षता और अवसर सबसे दूरस्थ गाँव के अंतिम कारीगर तक पहुँचने चाहिए। फाउंडेशन का उद्देश्य ग्रामीण बुनकर समुदायों के सामने मौजूद गहरे सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों—जैसे आर्थिक शोषण, कौशल की कमी और सीमित आजीविका अवसर—का समाधान करना है।
पीढ़ियों से कारीगर शोषणकारी बिचौलियों पर निर्भर रहे और उन्हें अपने श्रम का केवल एक छोटा हिस्सा ही प्राप्त होता था। जयपुर रग्स फाउंडेशन इस असंतुलन को समाप्त करते हुए एक पारदर्शी और निष्पक्ष आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करता है, जो गाँव के कारीगरों को सीधे वैश्विक उपभोक्ताओं से जोड़ती है, जिससे उन्हें नियमित कार्य, उचित पारिश्रमिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।


