गाजियाबाद, दिव्यराष्ट्र/ जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, इंदिरापुरम, गाजियाबाद द्वारा शनिवार, को ” एआईएम पीस 2026 : एआई इन मैनेजमेंट फॉर पीपुल एथिक्स अकाउंटेबिलिटी कोलेबोरेशन एंड इंटरप्राइज विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, कॉर्पोरेट पेशेवरों तथा शोधार्थियों ने भाग लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उत्तरदायी प्रबंधन, नैतिक नेतृत्व तथा सतत विकास के संदर्भ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव और संभावनाओं पर वैश्विक स्तर पर सार्थक संवाद स्थापित करना था।
सम्मेलन का शुभारंभ पंजीकरण एवं नेटवर्किंग सत्र के उपरांत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात सेठ आनंदराम जयपुरिया एजुकेशन सोसाइटी के चेयरमैन शिशिर जयपुरिया ने उद्घाटन एवं विषय संबोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य मानव बुद्धिमत्ता का स्थान लेना नहीं, बल्कि उसे और अधिक सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि भविष्य का प्रबंधन ऐसे एआई तंत्रों पर आधारित होगा जो नैतिकता, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने शिक्षा जगत एवं उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे मिलकर उत्तरदायी एआई नेतृत्व विकसित करें, जिससे समाज एवं अर्थव्यवस्था का समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
*शिशिर जयपुरिया ने कहा** “जैसे-जैसे एआई हर जगह फैल रहा है, हमारे सामने यह सवाल है कि इंसान, और खासकर लीडर्स, क्या भूमिका निभाएंगे। नए ज़माने की लीडरशिप को इस कॉन्फ्रेंस की थीम में शामिल सामाजिक और संगठनात्मक विकास के पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें मज़बूत बनाना चाहिए, जैसे: लोग, नैतिकता, जवाबदेही, सहयोग और उद्यम। ऐसी लीडरशिप ग्लोबल संगठनों को आगे बढ़ने में मदद करेगी और 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने की दिशा में देश की तरक्की को आगे बढ़ाएगी।”*
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन के मुख्य परिचालन अधिकारी प्रो. विशाल तलवार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में वैश्विक शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भविष्य के प्रबंधन मॉडल ऐसे होने चाहिए जो तकनीकी नवाचार और नैतिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित कर सकें। डॉ. प्रमोद कुमार, एक अनुभवी प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ एवं उद्योग जगत के प्रतिष्ठित नेतृत्वकर्ता, ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के निरंतर विकसित होते परिदृश्य पर अपने बहुमूल्य विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि नवाचार का मार्गदर्शन नैतिकता, जवाबदेही एवं मानवीय मूल्यों से होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने उत्तरदायी एआई आधारित उद्यमों के निर्माण के लिए शिक्षा जगत और उद्योग जगत के बीच अधिक सशक्त एवं घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
ग्लोबस स्पिरिट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परमजीत सिंह गिल ने उद्योग जगत के अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार एआई आधारित समाधान संगठनों की कार्यकुशलता, पारदर्शिता, सुशासन तथा हितधारकों के विश्वास को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण कांफ्रेंस सौवेनिर तथा संस्थान की रिसर्च जर्नल के नवीनतम अंक का विमोचन रहा। यह अवसर गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार तथा ज्ञान-सृजन के प्रति जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की सतत प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का समापन जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. (डॉ.) रविन्द्र नारंग द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन एवं अतिथियों के सम्मान के साथ हुआ। उन्होंने सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, शोधकर्ताओं, समीक्षकों, प्रतिभागियों तथा आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए