इंद्रजाल रेंजर™ ने होमलैंड-सिक्योरिटी व्हीकल की एक नई कैटेगरी पेश की है। यह एक खास तौर पर तैयार किया गया एंटी-ड्रोन पेट्रोल व्हीकल है, जो तेज रफ्तार से चलते हुए भी रोग ड्रोन्स को डिटेक्ट, ट्रैक, आइडेंटिफाई और काउंटर करने में सक्षम है।
पुलिस की गाड़ियां एक सदी से भी ज्यादा समय से शहरों की सड़कों पर पेट्रोलिंग कर रही हैं। अब भारत एक नए तरह का पेट्रोल व्हीकल जोड़ रहा है, जो आसमान में पेट्रोलिंग करेगा।
अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और सिंगापुर ने मिलिट्री इंस्टॉलेशंस के लिए एडवांस्ड काउंटर-ड्रोन क्षमताएं तैनात की हैं, लेकिन शहरी सुरक्षा में उनकी तैनाती अक्सर प्राइवेट सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी ऑपरेटर्स के जरिए जरूरत के मुताबिक की जाती है। भारत अब सरकारी स्तर पर काउंटर-ड्रोन पेट्रोलिंग को ऑपरेशनल रूप देने में आगे बढ़ रहा है। इसके तहत बॉर्डर सिक्योरिटी और शहरी पुलिसिंग के लिए खास तौर पर तैयार किए गए एंटी-ड्रोन पेट्रोल व्हीकल्स को एक स्थायी होमलैंड-सिक्योरिटी क्षमता के रूप में तैनात किया जा रहा है।
इंद्रजाल ऑटोनॉमस डिफेंस सिस्टम्स और सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स ने आज भारत सरकार से इंद्रजाल रेंजर के लिए लगभग ₹155 करोड़ के ऑर्डर्स की घोषणा की। इंद्रजाल-सिग्मा कंसोर्टियम को दिया गया ₹145 करोड़ का ऑर्डर इस क्षमता को भारत के बॉर्डर-सिक्योरिटी वातावरण में लेकर आता है। वहीं, लगभग ₹10 करोड़ का अलग अर्बन पुलिस ऑर्डर वीवीआईपी सुरक्षा और शहरी सुरक्षा के लिए रेंजर की तैनाती शुरू करता है।
मिलकर देखें तो ये तैनाती सिर्फ दो काउंटर-यूएएस खरीद से कहीं बड़ी हैं। ये होमलैंड-सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर की एक पूरी तरह नई कैटेगरी के उभरने का संकेत देती हैं: एंटी-ड्रोन पेट्रोल व्हीकल।
भारतीय होमलैंड सिक्योरिटी की एक नई परत
जिस तरह पेट्रोल व्हीकल्स ने जमीन पर पुलिसिंग और नागरिकों की सुरक्षा के तरीके को बदल दिया, उसी तरह ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से कम ऊंचाई वाले एयरस्पेस की लगातार पेट्रोलिंग की जरूरत पैदा हो रही है। बॉर्डर पर तैनाती नशीले पदार्थों, हथियारों और निगरानी करने वाले ड्रोन जैसे सीमा पार के खतरों से सुरक्षा को मजबूत करती है, जबकि पुलिस की तैनाती वीवीआईपी सुरक्षा, सार्वजनिक आयोजनों, एयरपोर्ट्स और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर में रेंजर की उपयोगिता को दिखाती है। दोनों मिलकर होमलैंड सिक्योरिटी में एंटी-ड्रोन पेट्रोल व्हीकल्स के एक नई ऑपरेशनल लेयर के रूप में उभरने का संकेत देते हैं।
भारत का पहला खास तौर पर तैयार किया गया एंटी-ड्रोन पेट्रोल व्हीकल
इंद्रजाल रेंजर™ भारत का एकमात्र एआरडीटीसी से अप्रूव्ड एंटी-ड्रोन पेट्रोल व्हीकल है। इसे एक मोबाइल काउंटर-यूएएस प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार और विकसित किया गया है, जो तेज रफ्तार से चलते हुए भी पूरे मिशन को पूरा करने की क्षमता रखता है। पारंपरिक फिक्स्ड-साइट सिस्टम्स के विपरीत, रेंजर सिक्योरिटी एजेंसियों को जरूरत के मुताबिक सुरक्षित एयरस्पेस उपलब्ध कराने में सक्षम बनाता है, चाहे मिशन सीमा पर हो, वीवीआईपी रूट्स पर, सार्वजनिक आयोजनों में या महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए।
पारंपरिक काउंटर-यूएएस तैनाती का मुख्य फोकस अब तक फिक्स्ड मिलिट्री या रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा पर रहा है। लेकिन होमलैंड-सिक्योरिटी से जुड़े खतरे स्वभाव से मोबाइल होते हैं। एक रोग ड्रोन नशीले पदार्थ लेकर हर रात अलग जगह से सीमा पार कर सकता है। वीवीआईपी काफिला शहर से होकर गुजरता है। कोई बड़ा सार्वजनिक आयोजन सिर्फ कुछ घंटों तक चलता है। महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर सैकड़ों किलोमीटर तक फैला हो सकता है।
इसलिए काउंटर-ड्रोन क्षमता को भी मिशन के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
स्काई-ओएस™ से संचालित रेंजर, एडवांस्ड सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर फ्यूजन, कमांड एंड कंट्रोल और कई स्तरों वाले काउंटरमेजर्स को एक ही ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म में एकीकृत करता है। इसे तीन एक-दूसरे के पूरक सुरक्षा स्तरों के आधार पर तैयार किया गया है:
- रिट्रैक्टर – कंट्रोल लें: रोग ड्रोन्स को सुरक्षित तरीके से अपने नियंत्रण में लेकर नियंत्रित रिकवरी और फॉरेंसिक जांच की सुविधा देता है।
- लक्ष्मण रेखा – दूर रखें: एक वर्चुअल सुरक्षा सीमा तैयार करता है, जो अनधिकृत ड्रोन को सुरक्षित एयरस्पेस में प्रवेश करने से रोकती है।
- नेट इंटरसेप्टर – नीचे गिराएं: जब इलेक्ट्रॉनिक उपाय पर्याप्त नहीं होते, तब दुश्मन ड्रोन को फिजिकली इंटरसेप्ट कर उसे पकड़ लेता है।
रेंजर को सरकारी मूल्यांकन के जरिए ऑपरेशनल स्तर पर मान्यता मिल चुकी है और इसे गृह मंत्रालय ने भी चुना है। रेंजर भारत के सबसे संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए देश में विकसित और फील्ड में साबित हो चुकी क्षमता उपलब्ध कराता है।
इंद्रजाल ऑटोनॉमस डिफेंस सिस्टम्स के फाउंडर और सीईओ, किरण राजू पेनुमाचा ने कहा, “यूक्रेन ने युद्ध में ड्रोन की क्षमता को दुनिया के सामने दिखाया। अब दुनिया भर में हम देख रहे हैं कि ड्रोन का खतरा सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है। सीमाओं, एयरपोर्ट्स, शहरों, सार्वजनिक आयोजनों, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और वीवीआईपी मूवमेंट्स को कम ऊंचाई वाले एयरस्पेस की लगातार सुरक्षा की जरूरत है। इसलिए काउंटर-यूएएस को किसी देश के रोजमर्रा के सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा बनना चाहिए। इंद्रजाल रेंजर™ को इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, ताकि सिक्योरिटी फोर्सेज खतरे के साथ-साथ ऑटोनॉमस काउंटर-ड्रोन क्षमता को भी वहां ले जा सकें, जहां खतरा मौजूद हो।”
सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स के सीईओ, सुनील कालिंदी ने कहा, “यह प्रोग्राम भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की ताकत को दिखाता है, जहां एडवांस्ड स्वदेशी टेक्नोलॉजी को विकसित करने के साथ-साथ बड़े ऑपरेशनल स्तर पर तैयार और उपलब्ध कराया जा सकता है। यह उपलब्धि सिग्मा की क्षमताओं को दिखाती है और भारत की सीमा और शहरी सुरक्षा को अगली पीढ़ी की एक महत्वपूर्ण क्षमता के साथ मजबूत करने में इंद्रजाल के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी को भी रेखांकित करती है।”
दुनियाभर में: काउंटर-यूएएस अब होमलैंड सिक्योरिटी की जरूरत
ये ऑर्डर्स दुनिया भर में हो रहे एक बड़े बदलाव को दिखाते हैं। काउंटर-ड्रोन क्षमता अब सिर्फ युद्ध के समय या मिलिट्री इंस्टॉलेशंस की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह रोजमर्रा की होमलैंड सिक्योरिटी की जरूरत बनती जा रही है।
हाल की घटनाएं भी इस बदलाव को दिखाती हैं। 2026 फीफा वर्ल्ड कप के दौरान अमेरिका ने अब तक का अपना सबसे बड़ा काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन चलाया, वहीं जर्मनी ने एयरपोर्ट के पास विस्फोटक से लदे ड्रोन से जुड़ी एक गंभीर सुरक्षा घटना के बाद ड्रोन डिफेंस के उपायों को मजबूत किया। जैसे-जैसे रोग ड्रोन्स से सीमाओं, एयरपोर्ट्स, शहरों, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक आयोजनों और सुरक्षित व्यक्तियों को खतरा बढ़ रहा है, दुनियाभर की सरकारें काउंटर-यूएएस क्षमताओं को नियमित सुरक्षा अभियानों में शामिल कर रही हैं। भारत द्वारा इंद्रजाल रेंजर™ को शामिल किया जाना इसी वैश्विक बदलाव का हिस्सा है।
ड्रोन का खतरा युद्ध शुरू होने के साथ शुरू नहीं होता और युद्ध खत्म होने के साथ खत्म भी नहीं होता।
आत्मनिर्भर भारत : ऑपरेशनल स्तर पर भारतीय टेक्नोलॉजी
ये प्रोग्राम भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी मजबूत करते हैं और दिखाते हैं कि भारत का प्राइवेट डिफेंस इकोसिस्टम देश की सुरक्षा से जुड़ी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को विकसित करने, बनाने और ऑपरेशनल स्तर पर इस्तेमाल करने में सक्षम है।
यह मॉडल दिखाता है कि भारतीय टेक्नोलॉजी इनोवेशन और भारतीय डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग एक साथ मिलकर दुनियाभर के देशों के सामने तेजी से उभर रही सुरक्षा चुनौतियों में से एक का सामना कर सकते हैं।