मुंबई दिव्यराष्ट्र*:सर्दियों के मौसम में बच्चों में कान के संक्रमण और उससे जुड़ी जटिलताओं के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के मौसम में सूखी हवा, बार-बार होने वाली सर्दी-खांसी और कान ढकने वाले उपकरणों के अधिक इस्तेमाल से बच्चों में कान की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, मुंबई की कंसल्टेंट पीडियाट्रिक ईएनटी डॉ. श्रुति बंसल ने बताया कि सर्दियों में बच्चों को कान में दर्द, खुजली और कभी-कभी कान से रिसाव की शिकायत के साथ अस्पताल लाया जाता है। कई मामलों में यह संक्रमण बैक्टीरियल होता है या फिर सर्दियों से जुड़ी अन्य कान संबंधी जटिलताओं के कारण होता है।उन्होंने बताया कि सर्दियों में बच्चों को बार-बार सर्दी, खांसी और नाक बंद रहने की समस्या होती है, जिससे कान का सामान्य वेंटिलेशन बाधित हो जाता है। चूंकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए शिशुओं और छोटे बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।डॉ. बंसल के अनुसार, ईयर मफ्स और ऊनी टोपी का लंबे समय तक इस्तेमाल, कानों तक हवा का कम पहुंचना, ठंडी और सूखी हवा से त्वचा का फटना, कमजोर प्रतिरक्षा और एक्ज़िमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं भी संक्रमण का जोखिम बढ़ाती हैं।उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि सर्दियों में बच्चों के कान सूखे रखें, नहाने के बाद हल्के हाथ से कान सुखाएं और समय-समय पर ईयर मफ्स या टोपी हटाकर कानों को हवा लगने दें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक ईयर ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें।विशेषज्ञों ने कहा कि यदि बच्चे को लगातार कान में खुजली, सुनने में दिक्कत, असामान्य डिस्चार्ज या बुखार के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न होने पर कान के संक्रमण गंभीर रूप ले सकते हैं।




