मुंबई, दिव्यराष्ट्र:/ भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) ने अपनी प्रौद्योगिकी अंगीकरण कोष (टेक्नोलॉजी अडॉप्शन फंड – टीएएफ) योजना के तहत वित्तपोषण के लिए तीन भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप – एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज़, सैटश्योर एनालिटिक्स इंडिया और टीएम2स्पेस टेक्नोलॉजीज़ – को पहली भारतीय गैर-सरकारी संस्था (एनजीई) के तौर पर चुना है। इसरो, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और इन-स्पेस के सदस्यों वाली विशेषज्ञ समिति ने कई चरणों वाली मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत इन तीन स्टार्टअप का चयन ऐसी परिवर्तनकारी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता के लिए किया है, जिसका लक्ष्य है, भारत की स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना और अंतरिक्ष क्षेत्र में इसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना।
बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष स्टार्टअप, एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान (स्पेस लॉन्च व्हीकल्स) के लिए हाई-थ्रस्ट क्लोज्ड-साइकिल लिक्विड रॉकेट इंजन (800 केएन) विकसित करेगी। इस परियोजना का लक्ष्य है, मीडियम से हेवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल के लिए उच्च दक्षता और मॉड्यूलर आर्किटेक्चर वाला 800 केएन-वर्ग का रियूजेबल लॉक्स-एलएनजी रॉकेट इंजन विकसित करना, जो अगली पीढ़ी के लॉन्च सिस्टम और ऑर्बिटल स्टेज के लिए वाणिज्यिक प्रोपल्शन समाधान के तौर पर काम करेगा।
बेंगलुरु की स्पेस एनालिटिक्स कंपनी सेट श्योर एनालिटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ‘धारिणी’ विकसित करेगी। यह एक लार्ज अर्थ ऑब्जर्वेशन मॉडल (एलओएम) होगा, जो रिमोट सेंसिंग अनुप्रयोगों के लिए भारत के आधारभूत एआई प्लेटफॉर्म के रूप काम करेगा।
हैदराबाद की कंपनी, टीएम2स्पेस टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड, उपग्रहों के लिए स्वदेशी एआई संचालित स्टार ट्रैकर सिस्टम विकसित करेगी, जिससे हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग और संचार मिशन के लिए ज़रूरी पॉइंटिंग सटीकता मिल सकेगी।
डॉ.पवन गोयनका, अध्यक्ष, इन-स्पेस ने कहा,”टेक्नोलॉजी अडॉप्शन फंड के तहत इन परियोजनाओं का चयन, भारत की निजी कंपनियों को वैश्विक स्तर अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रमुख उपक्रम बनाने के हमारे लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय कदम है। इस फंड के साथ, हम शुरुआती चरण के विकास और वाणिज्यिक सफलता के बीच के अंतर को पाटना चाहते हैं। हम इस वित्तीय समर्थन के साथ निजी क्षेत्र को अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पर काम करने के लिए सशक्त बना रहे हैं। ये परियोजनाएं सिर्फ नवोन्मेषी परिकल्पना भर नहीं हैं, बल्कि ये व्यावहारिक, बाज़ार के लिए तैयार (मार्केट-रेडी) समाधान हैं, जिनसे वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में हमारी मौजूदगी बढ़ेगी।”