‘राजाधिराज’ के निर्माताओं द्वारा प्रस्तुत हिंदी नाटक ‘सरदार’ में मनोज जोशी, सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका में है
-यह नाटक 24 और 25 अक्टूबर को कमानी ऑडिटोरियम में दर्शकों के सामने मंचित होगा|
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ कुछ कहानियाँ समय की सीमाओं से परे होती हैं। ये न केवल इतिहास की दिशा बदलती हैं, बल्कि एक देश की पहचान भी बनाती हैं। नाटक-सरदारः द आर्किटेक्ट ऑफ युनाइटेड इंडिया (एक अखंड भारत के शिल्पकार) सरदार वल्लभभाई पटेल की असाधारण कहानी और स्वतंत्रता के बाद भारत को एकजुट करने में उनकी अहम भूमिका को मंच पर पेश करता है। मुंबई में दर्शकों का दिल जीतने और भोपाल एवं गुजरात के विभिन्न शहरों का सफर तय करने के बाद, अब यह नाटक दिल्ली आ पहुंचा है। इसके ज़रिए भारत के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में से एक की कहानी बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचेगी।
इस नाटक के केंद्र में है सरदार पटेल की महान उपलब्धि, जिसके तहत उन्होंने 565 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में शामिल किया। इसी प्रयास से एक नव-स्वतंत्र और बिखरा हुआ राष्ट्र, एक अखंड भारत के रूप में बदल सका। अपनी राजनीतिक सूझबूझ, कूटनीति, बातचीत और राष्ट्रीय एकता के लिए अटूट प्रतिबद्धता के ज़रिए, पटेल ने भारत के इतिहास के सबसे अहम कार्यों में से एक को अंजाम दिया। उनकी विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी कि स्वतंत्रता के समय थी।
नीमट्री एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत यह नाटक , भारतीय इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को रंगमंच के माध्यम से जीवंत करता है। धनराज नाथवानी की परिकल्पना, वायरल रच्छ के निर्देशन, गीता माणिक की पटकथा और भूमि नाथवानी के प्रोडक्शन में बना यह नाटक उन चुनौतियों, वार्ताओं और फैसलों को सामने लाता है, जिन्होंने देश को एकजुट करने के पटेल के मिशन को आकार दिया।
नाटक में अभिनेता मनोज जोशी, सरदार वल्लभभाई पटेल की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वे मंच पर उस महान नेता के व्यक्तित्व, उनके दृढ़ विश्वास और संकल्प को जीवंत करते हैं, जिनका योगदान भारत के राष्ट्रीय इतिहास में हमेशा सर्वोपरि रहेगा। दमदार अभिनय और प्रभावशाली नाट्य-शैली के ज़रिए, यह नाटक दर्शकों को देश के इतिहास के एक अत्यंत महत्वपूर्ण पल का जीवंत अनुभव प्रदान करता है।
मुंबई, भोपाल, पुणे और गुजरात के बाद, दिल्ली में इसका मंचन ‘सरदारः द आर्किटेक्ट ऑफ यूनाइटेड इंडिया’ के लिए एक और उपलब्धि है। यह हर भारतीय से जुड़ी कहानी की पहुंच को और बढ़ाता है। विभिन्न शहरों के दर्शकों तक सरदार पटेल की विरासत को पहुंचाकर, यह नाटक उस दूरदर्शिता और नेतृत्व के प्रति सम्मान को फिर से जगाने का प्रयास करता है, जिसने एक अखंड भारत की नींव रखने में मदद की।