जयपुर-दिल्ली हाईवे पर टोल सिस्टम की कार्यप्रणाली पर
जयपुर, दिव्यराष्ट्र* जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर दौलतपुरा और मनोहरपुर टोल प्लाजा से गुजरने वाले एक वाहन मालिक के साथ ऐसा ही मामला सामने आया है। वाहन मालिक के अनुसार, उनकी कार का फास्टैग सक्रिय है और फास्टैग ऐप में 130 टोल क्रॉसिंग शेष दिखाई दे रही हैं। इसके बावजूद टोल प्लाजा पर भुगतान दर्ज नहीं हुआ और बाद में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से अनपेड यूजर फीस के तीन इलेक्ट्रॉनिक नोटिस जारी किए गए।
तीन नोटिस, कुल ₹510 की मांग*
उपलब्ध ई-नोटिस के अनुसार, वाहन संख्या आरजे 60Cबी 4425 के लिए शुल्क दर्ज किए गए हैं:
– *मनोहरपुर एमएलएफएफ टोल प्लाजा:* 26 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:03:17 बजे के क्रॉसिंग के लिए ₹190।
– *दौलतपुरा एमएलएफएफ टोल प्लाजा:* 26 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:38:35 बजे के क्रॉसिंग के लिए ₹160।
– *दौलतपुरा एमएलएफएफ टोल प्लाजा:* 26 अक्टूबर 2026 को शाम 4:42:43 बजे के क्रॉसिंग के लिए ₹160।
इस प्रकार, तीनों नोटिसों में कुल *₹510* की अनपेड यूजर फीस मांगी गई है। नोटिस में इसे लागू यूजर फीस का दोगुना बताया गया है।
जब फास्टैग चालू है, तो भुगतान क्यों नहीं हुआ?
वाहन मालिक का कहना है कि फास्टैग सक्रिय होने के साथ उसमें पर्याप्त टोल क्रॉसिंग भी उपलब्ध थीं। ऐसे में यह जांच का विषय है कि टोल शुल्क का भुगतान दर्ज क्यों नहीं हुआ। क्या फास्टैग रीडर, वाहन पहचान प्रणाली, नेटवर्क, खाते से जुड़े रिकॉर्ड या किसी अन्य तकनीकी प्रक्रिया में समस्या आई थी? या भुगतान विफल होने का कोई दूसरा कारण था?
इन सवालों का जवाब संबंधित टोल ऑपरेटर और एनएचएआई की तकनीकी जांच से ही मिल सकता है। फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों से यह साबित नहीं होता कि गलती निश्चित रूप से टोल सिस्टम की ही थी।
मैनलेस टोल व्यवस्था में जवाबदेही किसकी?*
मल्टी-लेन फ्री फ्लो जैसी इलेक्ट्रॉनिक टोल व्यवस्थाओं का उद्देश्य बिना रुके टोल वसूली करना और यातायात को सुगम बनाना है। लेकिन ऐसी व्यवस्था में यदि भुगतान दर्ज नहीं होता, तो वाहन मालिक को इसकी सूचना कैसे मिलेगी? तकनीकी गड़बड़ी होने पर उसकी शिकायत कौन सुनेगा? और जांच पूरी होने तक जुर्माने की वसूली पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आम वाहन चालक डिजिटल टोल व्यवस्था पर भरोसा करके यात्रा करता है। यदि सक्रिय फास्टैग के बावजूद भुगतान संबंधी विवाद पैदा होता है, तो उसे अपना पक्ष रखने और तकनीकी रिकॉर्ड की जांच करवाने का सरल अवसर मिलना चाहिए।
72 घंटे की समय-सीमा और वाहन मालिक की चिंता*
एनएचएआई I के ई-नोटिस में बताया गया है कि नोटिस जारी होने के 72 घंटे के भीतर निर्धारित पोर्टल पर भुगतान करने पर संबंधित वाहन श्रेणी की लागू यूजर फीस का भुगतान किया जा सकता है। इसके बाद भुगतान करने पर लागू यूजर फीस के दो गुने के बराबर राशि देय होने की बात कही गई है।
नोटिस में यह भी उल्लेख है कि 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होने और कोई प्रतिनिधित्व लंबित नहीं होने की स्थिति में मामले को रिकॉर्ड में भेजा जा सकता है तथा वाहन संबंधी कुछ सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
ऐसी स्थिति में वाहन मालिक के लिए समय पर शिकायत दर्ज करना और भुगतान व फास्टैग के रिकॉर्ड सुरक्षित रखना आवश्यक है।
आम आदमी क्या करे?*
यदि किसी वाहन चालक को सक्रिय फास्टैग होने के बावजूद ऐसा नोटिस मिलता है, तो उसे फास्टैग बैंक से ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट, खाते का बैलेंस, टोल क्रॉसिंग का विवरण और संबंधित नोटिस सुरक्षित रखने चाहिए। साथ ही, ऐनएचएआई के निर्धारित ई-नोटिस पोर्टल पर उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार शिकायत या आपत्ति दर्ज करानी चाहिए और संबंधित टोल प्लाजा से कैमरा रिकॉर्ड तथा भुगतान लॉग की जांच की मांग करनी चाहिए।
इस मामले में एनएचएआई और संबंधित टोल ऑपरेटर को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सक्रिय फास्टैग और उपलब्ध टोल क्रॉसिंग के बावजूद भुगतान दर्ज क्यों नहीं हुआ। यदि जांच में तकनीकी या परिचालन संबंधी गलती सामने आती है, तो वाहन मालिक को अनुचित आर्थिक बोझ से राहत देने के लिए उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
*डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य आम आदमी की सुविधा बढ़ाना है, न कि उसे ऐसी तकनीकी समस्याओं के बीच उलझाना जिनका समाधान उसके नियंत्रण से बाहर हो। फास्टैग सक्रिय होने के बावजूद भुगतान विवाद पैदा होने पर पारदर्शी जांच, आसान शिकायत प्रक्रिया और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना आवश्यक है।