मुंबई दिव्यराष्ट्र:/ आईआईएम बैंगलोर में ब्रिंगिंग एविडेंस इंटू पब्लिक हेल्थ पॉलिसी 2026 के पांचवें संस्करण का शुभारंभ हुआ। ‘बदलते परिवेश में भविष्य-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणालियां’ विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान आईआईएम बैंगलोर, आईआईएम उदयपुर, आईआईएम शिलांग और आईआईएम रांची द्वारा तैयार रिपोर्ट ‘हेल्थकेयर एट योर डोरस्टेप: द प्रॉमिस ऑफ आयुष्मान आरोग्य मंदिर्स’ जारी की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अध्ययन के अनुसार ये केंद्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, गैर-संचारी रोगों की देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और टेली-परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इस अवसर पर आईआईटी बॉम्बे के नेशनल डिजीज मॉडलिंग कंसोर्टियम की रिपोर्ट ‘टेक्नोलॉजी फॉर हेल्थकेयर: इंडिया’ज़ मंत्रा फॉर यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ भी जारी की गई। रिपोर्ट में डिजिटल तकनीक, डेटा सिस्टम और रोग मॉडलिंग को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया।रिपोर्टों का लोकार्पण करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने कहा कि भारत में संसाधनों और तकनीक की कमी नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती प्रभावी क्रियान्वयन और विश्वास की कमी है। उन्होंने शोध निष्कर्षों को जमीनी स्तर पर लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। आईसीएमआर की अतिरिक्त महानिदेशक संघामित्रा पति ने कहा कि विकसित भारत का मार्ग आयुष्मान भारत से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर किया जा सकता है। इस सम्मेलन में स्वास्थ्य प्रणालियों को अधिक सुदृढ़, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बनाने के उपायों पर चर्चा की गई।