
(दिव्य राष्ट्र के लिए डॉ. सीमा दाधीच)
सूर्यनगरी जोधपुर की भूमि पर माता अमर कौर एवं पिता रामचंद्र पुरोहित के घर जन्मे डॉ.अरविंद पुरोहित ने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा के लिए समर्पित किया है। समाज एवं युवा पीढ़ी का मार्ग दर्शन करने के लिए उनके द्वारा लिखित पुस्तके विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। पुरोहित शिक्षा जगत में जाना पहचाना नाम है। जिन्होंने अध्ययन और अध्यापन क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके जीवन से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है उन्होंने अध्यापन क्षेत्र में 45 वर्ष की अहम भूमिका निभाकर समाज में एक नई जागृति पैदा की हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद भी अध्ययन और अध्यापन का कार्य इनके जीवन में बसा रहा और माता शारदा की कृपा से पुरोहित ने 16 पुस्तके लिखी, उन्होंने अपने जीवन काल में जो देखा अनुभव किया समझा वो अब नई पीढ़ी के साथ साझा कर रहे है और नई पीढ़ी में नई ऊर्जा एवम् सकारात्मकता का बीजा रोपण करना ही पुरोहित के जीवन का उद्देश्य बनकर रह गया हैं। पुरोहित ने अपने जीवन के 76 वे वर्ष में भी अध्ययन और अध्यापन से मोह भंग नहीं किया। विभिन्न विषयों पर 16 पुस्तको का लिखना उनके जीवन के 16 संस्कार की पहचान को दर्शाता है। जीवन में बीज रोपण से वृक्ष और फल फूल तभी लगते है जब मन प्रसन्न और मस्तिष्क स्वस्थ रहे आपने इसे अपनी पुस्तक के माध्यम से बताया है। यह चाहते तो कोरोना के बाद अपना जीवन अपने परिवार के साथ हंसी-खुशी से बिता सकते थे, लेकिन इन्होंने समाज को अपना परिवार माना उन बच्चों को अपना परिवार माना जो बच्चे शिक्षा से या अपने जीवन में कहीं कुंठा भाव रखते हुए बढ़ रहे हैं और कहीं ना कहीं उनके जीवन में नकारात्मकता ने घर कर लिया हो उसे ये पुस्तक के माध्यम से सकारात्मकता ऊर्जा भरना चाहते है।
यह आधुनिक काल में या ऐसे कहे तो नई पीढ़ी नया दौर और नया प्रचलन में युवा इसका तारतम्य नहीं बिठा पा रहे हैं, पुरोहित ने अपनी पुस्तक में जटिलताओं से कैसे उभरे,जीवन को सरल कैसे किया जाए, जीवन जीने के तरीके,जीवन में सकारात्मकता के साथ हम कार्यों को करें और हम कैसे खुश रह सकते हैं इन्होंने सभी पहलुओं को लिया, उसके साथ ही उन्होंने अपने जीवन में व्यक्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है उसको सरल तरीका बताया, हम किस तरह से सरल तरीके से उच्च प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करके अपने जीवन में सफल हो सकते हैं।
यदि हम बात करे इनकी पुस्तके हमारे आने वाले समाज की नई पीढ़ी को प्रेरणा देगी और जीवन में सफल बनाएगी। पुरोहित ने महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया है जिसमें राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर में पादप क्रिया विज्ञान के प्रोफेसर, मानव संसाधन विकास, कृषि प्रसार शिक्षा योजना एवं अनुवेक्षण के निदेशक भी रहे हैं। पुरोहित को 45 वर्ष से अधिक का समृद्ध शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनुभव प्राप्त हैं उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में प्रोफेसर और निर्देशक के रूप में अपनी सेवाएं दी है यह सेवानिवृत्ति के पश्चात भी है विजिटिंग प्रोफेसर विशेष अधिकारी एवं परामर्श दाता के रूप में सक्रिय रहे हैं।
उन्होंने कृषि विज्ञान के सत्र में 11 पुस्तकों का संपादन एवं प्रकाशन किया तथा सेहत जीवन कौशल और सफलता के क्षेत्र में 16 किताबें लिखिए इनके अतिरिक्त कृषि विज्ञान संबंधित अनेक शोध पत्र, लेख और पुस्तक का अध्ययन लिखे हैं तथा अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में भाग लिया आपको राजस्थान के प्रथम और एकमात्र बैच फाउंडेशन के पंजीकृत परामर्शदाता है जिन्होंने बैच केंद्र इंग्लैंड से तीन स्तरों का प्रमाण प्राप्त किया है उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऑनलाइन पाठ्यक्रम का भी अध्ययन किया यह बताता है कि इन्होंने अपने जीवन में शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों की भूमिका को बहुत ही अच्छे से निर्वाह किया है।

