दिव्यराष्ट्र के लिए- गुलाब बत्रा: अनादि काल से भारत में मनाये जाने वाले ज्योतिपर्व दीपावली को यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में सम्मिलित करके एक वैश्विक संस्था के रूप में खुद को गौरवान्वित किया है।
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने वर्ष 2025 में विश्व धरोहर सूची में दीपावली सहित दुनिया की 20 सांस्कृतिक परम्पराओं को शामिल किया था। यह इस घोषणा का दूसरा वर्ष है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि दीपावली पर्व हमारी सभ्यता की आत्मा है जो हमारी संस्कृति और मूल्यों के करीब है। यह ज्ञान और धर्म का प्रतीक है।
यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की दृष्टि से भारत भूमि के परम्परागत, शाश्वत एवं सार्वभौमिक संदेश “तमसो मा ज्योतिर्गमय” की प्रतीक है। दीपावली पर्व से कई प्रसंग जुड़े हैं।
विश्व धरोहर सूची में दीपावली पर्व को सम्मिलित करने से भारत की सूची की संख्या सोलह हो गई है। इसमें राजस्थान का कालबेलिया नृत्य, गुजरात का गरबा, कोलकाता की दुर्गा पूजा, रामलीला, कुम्भ मेला एवं वैदिक मंत्रोच्चार भी शामिल हैं। ब्रिटिश भारत में कुम्भ के आयोजन के सिलसिले में एक अंग्रेज अधिकारी छानबीन करते समय प्राप्त जानकारी से हतप्रभ रह गए। उन्हें लगा कि विशाल पैमाने पर होने वाले कुम्भ मेले के लिए विज्ञापन किए जाते होंगे और अन्य व्यवस्थाओं की जरुरत होती होगी। जब उन्हें बताया गया कि ज्ञानी पंडित निर्धारित अंतराल पर कुम्भ आयोजन की तिथि बहुत पहले घोषित कर देते हैं और देश के दूर दराज इलाकों से आस्थावान आम जन कुंभ स्नान के लिए सहज रूप से पहुँचते हैं। वह अधिकारी आश्चर्य में पड़ गये।
कुंभ मेले और योग को सांस्कृतिक विरासत सूची के पश्चात पिछले वर्ष से दीपावली भी इसमें सम्मिलित की गई है। अब तो 21 जून को दुनिया भर में अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। अब दीपावली पर्व की लोकप्रियता वैश्विक रूप लेगी। विदेशों में जहां भारतवासी निवास करते हैं वहां दीपावली पर्व धूमधाम से मनाई जाती है।
सांस्कृतिक परम्परा से समृद्ध दीपावली पर्व हमारी सामूहिकता का प्रतीक है। लाखों करोड़ों भारतवासी अपनी-अपनी भूमिका दीपावली उत्सव के लिए निभाते हैं। इनमें कुम्हार, कारीगर, किसान मिठाई प्रतिस्पर्धी रोशनी सजावट कर्ता, मिठाई – नमकीन तैयार करने वाले हलवाई दीपावली पूजन से जुड़ी सामग्री तैयार करने तथा उसकी बिक्री करने सहित कामगारों की लंबी सूची गिनी जा सकती है। पिछले दशकों में गुलाबी नगर जयपुर में दीपावली की आकर्षक साज सज्जा और रोशनी देखने के लिए देशी विदेशी पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 80 वें स्वाधीनता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में विकसित भारत 1947 विजन के लिए सप्तधारा के अन्तर्गत भारत की जिस “सॉफ्ट पॉवर” का उल्लेख किया था, उसमें सांस्कृतिक प्रभाव पर बल है। यह दीप पर्व भी इसी का परिचायक है। विश्व विरासत सूची में दीपावली को स्थान मिलना हमारी सांस्कृतिक कूटनीति का प्रतिफल है।
– गुलाब बत्रा
पूर्व समाचार संपादक यूनीवार्ता
मो.- 9530383630