
(दिव्यराष्ट्र के लिए डॉ. सीमा दाधीच)
आज सुबह जैसे ही मैने उठकर समाचारों पर नजर गड़ाने कि कोशिश की तो यह सुनकर धक्का लगा कि शोले फिल्म के डायलॉग से फिल्मी दुनियां के लोगों का दिल जीतने वाला वीरू इस दुनियां को छोड़ गया। यह खबर सुनते ही मुझे ना जाने धर्मेंद्र के कितने ही डायलॉग और ना जाने कितनी ही फिल्मों के दृश्य आंखों में उतरने लगे।
बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र भारतीय सिनेमा के उस युग का प्रतिनिधित्व कररहे थे जब सादगी और स्टारडम का अनोखा संगम दिखाई देता था। 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के नसराली गांव में जन्मे धर्म सिंह देओल, उर्फ धर्मेंद्र, ने न केवल अभिनय की नई परिभाषा गढ़ी बल्कि एक ऐसे दौर को भी अमर कर दिया, जब दर्शक अभिनेता को नायक नहीं, अपने घर के सदस्य की तरह देखते थे।
1960 के दशक में फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से करियर की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र ने धीरे-धीरे अपनी मेहनत और करिश्मे से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। फूल और पत्थर (1966) की सफलता ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। इसके बाद शोले, चुपके चुपके, अनुपमा, बंधन, धरम वीर और सत्यमेव जयते जैसी फिल्मों ने उन्हें अभिनय के हर रंग में साबित किया—चाहे वे एक्शन हीरो हों, हास्य भूमिकाओं में सरल पति या संवेदनशील प्रेमी।
धर्मेंद्र की लोकप्रियता सिर्फ उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं रही। वे भारतीय सिनेमा के उस दौर के प्रतीक हैं, जब सितारे आम जनता के दिलों में सादगी और ईमानदारी के लिए पूजे जाते थे। उनका मुस्कराता चेहरा, पंजाबी ठसक और संवाद अदायगी आज भी दर्शकों को पुरानी यादों में ले जाती है। अपने समय में धर्मेंद्र न केवल रोमांस के बादशाह थे बल्कि एक्शन फिल्मों के भी अग्रदूत रहे। उन्हें “ही-मैन ऑफ बॉलीवुड” की उपाधि इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने भावनाओं के साथ-साथ ताकत और पुरुषत्व का नया चेहरा पेश किया।
राजनीति में भी धर्मेंद्र ने अपना कदम रखा। 2004 में वे भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर राजस्थान के बीकानेर से लोकसभा सांसद चुने गए। हालांकि राजनीतिक जीवन में वे उतने सक्रिय नहीं रहे, लेकिन जनता के प्रति उनके जुड़ाव ने उन्हें सम्मान दिलाया।
— रॉकी और रानी की प्रेम कहानी (2023) में उनका अभिनय दर्शकों की आंखें नम कर गया। वे इस बात का प्रमाण हैं कि असली कलाकार उम्र से नहीं, जुनून से जवान रहता है।
धर्मेंद्र की विरासत उनके पुत्र सनी देओल और बॉबी देओल के जरिए आगे बढ़ रही है। लेकिन जो आभा धर्मेंद्र ने अपने व्यक्तित्व और अभिनय से रची, वह अद्वितीय है।
भारतीय सिनेमा के इस ‘ही-मैन’ को सलाम, जिन्होंने सादगी, संघर्ष और समर्पण से अपने जीवन को मिसाल बना दिया। धर्मेंद्र करोड़ों लोगों को यह सिखाते हैं कि स्टारडम केवल चमक-दमक से नहीं, बल्कि इंसानियत और दिल की गर्मजोशी से बनता है। अभिनेता कहूं या राजनेता महान व्यक्तित्व को कोटि कोटि नमन




