नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने देश में चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की हैं। इनमें किफायती वित्त की उपलब्धता, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन, साझा पुनर्चक्रण अवसंरचना का विकास, उद्योग जगत की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को प्रोत्साहन तथा सरकारी खरीद के माध्यम से पुनर्चक्रित सामग्री की मांग बढ़ाना शामिल है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के तीसरे सर्कुलर इकोनॉमी सम्मेलन को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था की शुरुआत हमारी उपभोग संबंधी आदतों से होती है। अब यह संसाधनों के उपयोग, पुनर्प्राप्ति, पुनः उपयोग और उन्हें दोबारा अर्थव्यवस्था में शामिल करने की संपूर्ण प्रक्रिया को बदलने वाले दृष्टिकोण के रूप में विकसित हो रही है।
उन्होंने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था के अगले चरण में केवल पुनर्चक्रण की मात्रा बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले, पारदर्शी, पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित और आर्थिक रूप से व्यवहार्य पुनर्चक्रण पर ध्यान देना होगा। इसके साथ ही पुनर्प्राप्त सामग्री के लिए मजबूत बाजार विकसित करना भी आवश्यक है।
ईपीआर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर
मंत्री ने कहा कि विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) व्यवस्था पुनर्चक्रण क्षेत्र में वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराती है। इससे पुनर्चक्रण क्षमता के विस्तार, आधुनिक तकनीक अपनाने और पुनर्चक्रण मूल्य शृंखला में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने बताया कि विभिन्न अपशिष्ट श्रेणियों के लिए डिजिटल अनुपालन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ईपीआर पोर्टलों के बीच एकीकरण और परस्पर अनुकूलता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करने और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।
यादव के अनुसार, सरकार अप्रैल 2027 तक पूर्ण रूप से कार्यशील एकीकृत ईपीआर मंच विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इससे उद्योगों को अनुपालन संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उद्योगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी
सम्मेलन में सीआईआई राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था परिषद की अध्यक्ष अध्यक्ष अंजलि सिंह ने कहा कि उद्योग जगत को केवल उत्पादों के उपयोग के बाद उनके निपटान से जुड़ी जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय उत्पाद और पैकेजिंग की डिजाइन, सामग्री के चयन तथा उनकी पहचान और आपूर्ति शृंखला में पारदर्शिता जैसे शुरुआती चरणों से ही चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सीआईआई भारत की चक्रीय अर्थव्यवस्था संबंधी महत्वाकांक्षाओं को विभिन्न क्षेत्रों और मूल्य शृंखलाओं में व्यावहारिक रूप देने के लिए सरकार, उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सीआईआई वेस्ट टू वर्थ टेक्नोलॉजीज के अध्यक्ष मसूद मलिक ने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए खुले, बाजार-आधारित दृष्टिकोण के साथ उद्योगों के बीच संवाद और सहयोग आवश्यक है।
नीति, तकनीक और बाजार के समन्वय पर मंथन
मेनस्ट्रीमिंग सर्कुलर इकोनॉमी’ विषय पर आयोजित तीसरे सीआईआई सर्कुलर इकोनॉमी सम्मेलन में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन में चक्रीय अर्थव्यवस्था को विभिन्न उद्योग क्षेत्रों और मूल्य शृंखलाओं में व्यापक रूप से लागू करने के उपायों पर चर्चा की गई।
इस दौरान संसाधनों के पुनर्चक्रण के मापन के मानक, रिवर्स लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता मानक और नए व्यावसायिक मॉडल जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य पुनर्चक्रण को केवल अपशिष्ट प्रबंधन तक सीमित रखने के बजाय उसे संसाधन दक्षता, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना रहा।