पीआईईटी में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
जयपुर, दिव्य राष्ट्र/ पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (पीआईईटी) में एनएसएस यूनिट की ओर से नशा मुक्त भारत अभियान के तहत “शराब और युवा मन: लत” पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के बीच शराब और नशीले पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करना था। इस पहल ने स्टूडेंट्स को सही जानकारी के साथ—साथ जिम्मेदार फैसले लेने और स्वस्थ व संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
पीआईईटी के डायरेक्टर डॉ. दिनेश गोयल ने जिम्मेदार नागरिक बनाने और युवाओं में उन मुद्दों के प्रति जागरूकता पैदा करने में शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, जो सीधे तौर पर उनके स्वास्थ्य, भलाई और भविष्य को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों के प्रतिष्ठित पैनल में मनोरोग विशेषज्ञ एवं एनएमएचपी के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. एस. एम. स्वामी, यूनिसेफ के सलाहकार एवं जयपुर पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल रवि गुप्ता, यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल और मनोवैज्ञानिक, लाइफ कोच व सृजन फाउंडेशन की संस्थापक एडवोकेट इंदु तोमर शामिल रहे। इस अवसर पर पीआईईटी की एनएसएस समन्वयक डॉ. नूपुर जैन और एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी रॉबिन प्रकाश भी उपस्थित रहे।
इन विशेषज्ञों ने स्टूडेंट्स को शराब व नशीले पदार्थों के सेवन के मनोवैज्ञानिक, शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक परिणामों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि कैसे लत किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य, शैक्षणिक और पेशेवर जीवन, रिश्तों, परिवार और पूरे समाज पर बुरा असर डाल सकती है। वक्ताओं ने स्टूडेंट्स को शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानने, साथियों के दबाव का सामना करने, जरूरत पड़ने पर सही मदद लेने और अपने परिवारों, परिसरों और समुदायों में सकारात्मक बदलाव के दूत बनने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
एनएसएस कैप्टन वैभव शर्मा और हैप्पी हाइव कैप्टन आदित्य अग्रवाल ने कहा कि युवाओं के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये उन्हें जीवन के सही पड़ाव पर सही जानकारी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की ताकत है। जागरूकता, ज़िम्मेदार फैसलों और सामूहिक भागीदारी के ज़रिए हम अपने साथियों को नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने और एक स्वस्थ व नशा-मुक्त भारत बनाने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। कार्यक्रम का समापन पर स्वस्थ, सुरक्षित, जिम्मेदार और नशा-मुक्त भारत बनाने की दिशा में काम करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।