जयपुर, दिव्यराष्ट्र /ओरल कैंसर शुरुआती चरणों में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के होता है, लेकिन भारत में यह बिल्कुल भी दुर्लभ नहीं है। भारत में ओरल कैंसर के मामलों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है, जहां हर साल 1 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं। यह देश में कुल कैंसर मामलों का लगभग 30% हिस्सा है। हालांकि, यह सबसे अधिक रोके जा सकने वाले कैंसरों में से एक है और यदि शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाए तो इसका इलाज भी काफी हद तक संभव है। तंबाकू का सेवन—किसी भी रूप में—ओरल कैंसर का सबसे बड़ा कारण है, जो लगभग 95% मामलों के लिए जिम्मेदार है।
ग्लोबोकन 2022 और नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम ( एनसीआरपी) के आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 1,43,759 से 1,46,000 नए ओरल कैंसर के मामले सामने आते हैं। इसके अलावा, हर वर्ष 52,000 से 75,000 लोगों की मृत्यु होती है—यानि औसतन हर घंटे 5 से अधिक मौतें।
डॉ. जितेंद्र कुमार शर्मा, कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (हेड एंड नेक), फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ओरल कैंसर के जोखिम कारक, शुरुआती संकेत, जांच, उपचार और बचाव के उपायों पर प्रकाश डालते हैं।
*ओरल कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक**
• ++तंबाकू का सेवन: भारत में 80% से अधिक मामलों का संबंध तंबाकू से है, विशेषकर गुटखा, पान मसाला और खैनी जैसे स्मोकलेस तंबाकू से।
• ++ सुपारी (एरिका नट): सुपारी चबाने की आदत एक महत्वपूर्ण कैंसरकारी कारण है।
• ++ शराब और धूम्रपान: शराब और बीड़ी/सिगरेट का संयुक्त सेवन जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।
• ++ एचपीवी संक्रमण: ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (विशेषकर एचपीवी 16/18) एक उभरता हुआ कारण है, जो 20-30% मामलों में पाया जाता है, खासकर युवाओं में।
*ओरल कैंसर की जांच कैसे होती है**
शुरुआती पहचान बेहतर उपचार परिणामों की कुंजी है। समय पर सर्जरी और अन्य उपचार से जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है। 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, तंबाकू/शराब सेवन करने वाले और जिनके परिवार में कैंसर का इतिहास है, उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए।
स्क्रीनिंग सरल, तेज और बिना दर्द वाली प्रक्रिया है, जिसमें मुंह की सामान्य जांच की जाती है। यदि कोई असामान्यता दिखती है, तो आगे की जांच की जाती है।
भारत में अक्सर यह कैंसर देर से पकड़ा जाता है, जिसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी है। इसलिए उच्च जोखिम वाले लोगों को साल में कम से कम एक बार जांच जरूर करानी चाहिए।
ओरल कैंसर केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं, बल्कि एक व्यवहार से जुड़ी समस्या भी है। जागरूकता और नियमित जांच के माध्यम से हर साल हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।
इस ओरल कैंसर जागरूकता माह में, एक मिनट निकालकर अपने मुंह की जांच जरूर करें—यह समय रहते किसी गंभीर बीमारी को पहचानने का सबसे आसान तरीका हो सकता है।