
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ भारत में त्योहार हमेशा से जश्न मनाने, अपनों के साथ वक्त बिताने और सोच-समझकर तोहफे देने का मौका रहे हैं। अब यही चलन प्रीमियम स्पिरिट्स तक भी पहुंच रहा है। लोग रूटीन वाले गिफ्ट्स से हटकर ऐसी चीजें चुनना पसंद कर रहे हैं, जिनकी अपनी एक पहचान और कहानी हो, जिनमें कारीगरी झलके और जो एक अलग अनुभव दें। इस बदलाव ने इंडियन सिंगल माल्ट के लिए एक दिलचस्प मौका खड़ा किया है, खासकर तब, जब डिस्टिलरीज त्योहारों के लिए लिमिटेड रिलीज, स्पेशल एडिशन और खास तौर पर तैयार किए गए वैरिएंट्स बाजार में ला रही हैं।
पिछले दस सालों में इंडियन सिंगल माल्ट व्हिस्की का सफर कमाल का रहा है। एक वक्त था जब दुनिया के जाने-माने व्हिस्की बनाने वाले इलाकों के आगे इंडियन सिंगल माल्ट की ज्यादा चर्चा नहीं होती थी, लेकिन आज इसने अपनी एक मजबूत पहचान बना ली है। इंटरनेशनल मुकाबलों में मिले अवॉर्ड, ग्राहकों की बढ़ती जानकारी और मैच्योरेशन (व्हिस्की को लकड़ी के पीपों में रखकर पकाने की प्रक्रिया) व कास्क यानी पीपों के चुनाव में हो रहे नए-नए प्रयोगों ने इस रफ्तार को और तेज किया है। अब स्पेशल एडिशन इस कहानी में एक नया अध्याय जोड़ रहे हैं।
रेगुलर वैरिएंट्स से अलग, लिमिटेड और फेस्टिव रिलीज के जरिए डिस्टिलरीज को अपने व्हिस्की बनाने के अंदाज और सोच के कुछ खास पहलू दिखाने का मौका मिलता है। इसमें किसी खास कास्क की फिनिश हो सकती है, मैच्योरेशन का कोई हटकर तरीका हो सकता है, कोई खास बैच हो सकता है, किसी मौके की याद में निकाला गया एडिशन हो सकता है या फिर बड़ी सावधानी से चुने गए कास्क्स का मेल। ग्राहकों के लिए यह उन बारीकियों को समझने और महसूस करने का मौका है, जो शायद किसी डिस्टिलरी की रेगुलर रेंज में न मिलें।
इसकी खूबी सिर्फ बोतल के अंदर की व्हिस्की में नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे अनुभव में भी है। आज के प्रीमियम ग्राहक यह जानना चाहते हैं कि वे असल में खरीद क्या रहे हैं — कौन-सा अनाज इस्तेमाल हुआ, डिस्टिलेशन कैसे हुआ, व्हिस्की कितनी पुरानी है, किस कास्क में पकी और कास्क का उस पर क्या असर पड़ा, वह कहां बनी और उसके पीछे कौन लोग हैं। यही वजह है कि अब बोतल के अंदर की व्हिस्की के साथ-साथ उसकी पैकेजिंग और उससे जुड़ी कहानी भी उतनी ही अहम हो गई है। अच्छे से डिजाइन किया गया एक स्पेशल एडिशन व्हिस्की के मिजाज और विरासत को बखूबी बयां करता है और तोहफे को ज्यादा निजी और खास बना देता है।
त्योहारों के मौसम में यह बात और भी मायने रखती है, क्योंकि अब प्रीमियम तोहफों में चीज से ज्यादा उससे जुड़े अनुभव की कद्र होने लगी है। इंडियन सिंगल माल्ट की एक बोतल सिर्फ जश्न का एक ड्रिंक भर नहीं होती; यह बातचीत शुरू करने का बहाना बन सकती है और भारत में व्हिस्की बनाने की बढ़ती काबिलियत को करीब से जानने का मौका भी। कलेक्टर्स और व्हिस्की के शौकीनों के लिए लिमिटेड रिलीज अपनी जानी-पहचानी डिस्टिलरीज के अलग-अलग वैरिएंट्स को आजमाने और यह समझने का जरिया भी हैं कि मैच्योरेशन और ब्लेंडिंग में छोटे-छोटे बदलाव स्वाद पर कैसे असर डालते हैं।
लेकिन जैसे-जैसे यह कैटेगरी बढ़ रही है, यह भी उतना ही जरूरी है कि नए प्रयोग असलियत और पारदर्शिता की जमीन पर टिके रहें। ग्राहकों को साफ-साफ पता होना चाहिए कि कोई वैरिएंट आखिर खास क्यों है। व्हिस्की कहां बनी, उसमें क्या-क्या इस्तेमाल हुआ, उसे कैसे बनाया और पकाया गया — इसकी सही जानकारी से ग्राहकों का भरोसा बढ़ता है और वे सोच-समझकर चुनाव कर पाते हैं।
असलियत के प्रति यही प्रतिबद्धता इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन (आईएमडब्ल्यूए) के काम की बुनियाद भी है। आईएमडब्ल्यूए भारत और दुनिया भर में इंडियन सिंगल माल्ट व्हिस्की कैटेगरी की सुरक्षा, संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए काम करता है। आईएमडब्ल्यूए ऐसे स्टैंडर्ड्स बनाए रखने पर जोर देता है जो ग्लोबल बेंचमार्क के मुताबिक हों, ताकि इंडियन सिंगल माल्ट को सिर्फ उसके खास भारतीय मिजाज के लिए ही नहीं, बल्कि उसकी क्वालिटी, असलियत और ईमानदारी के लिए भी पहचाना जाए। ग्राहकों के लिए अब भरोसे की एक आसान निशानी भी है — बोतल पर लगा आईएमडब्ल्यूए सर्टिफिकेशन मार्क होलोग्राम। जब भी आप इंडियन सिंगल माल्ट चुनें, तो आईएमडब्ल्यूए होलोग्राम जरूर देखें। यह निशान असली होने की पहचान है और इंडियन सिंगल माल्ट व्हिस्की कैटेगरी की साख और भरोसे को और मजबूत करता है।
इसलिए त्योहारों का यह मौसम इंडियन सिंगल माल्ट के लिए सिर्फ कारोबार बढ़ाने का मौका नहीं है। यह ग्राहकों को इस कैटेगरी से और गहराई से जोड़ने का भी मौका है। स्पेशल एडिशन लोगों को सिर्फ व्हिस्की पीने से आगे बढ़कर उसकी कारीगरी, उसकी जड़ों और उसकी अलग पहचान की कद्र करना सिखा सकते हैं।
भारत की सिंगल माल्ट की कहानी अभी लिखी जा रही है। डिस्टिलरीज माल्ट व्हिस्की बनाने के बुनियादी उसूलों पर टिके रहते हुए लगातार नए प्रयोग कर रही हैं, और ऐसे में स्पेशल एडिशन इस बदलती तस्वीर में झांकने की एक खिड़की बन सकते हैं। त्योहारों की इस रौनक में शायद सबसे दिलचस्प बोतलें वही होंगी, जो ग्राहकों को लेबल से आगे देखने और बोतल के अंदर छिपी कहानी, कारीगरी और मिजाज को खोजने का न्योता दें।





