
दिव्यराष्ट्र, जयपुर: फाइनेंशियल प्लानिंग हम इस उम्मीद के साथ करते हैं कि आने वाला समय आज जैसा ही रहेगा। हर महीने सैलरी आती रहेगी, हम निवेश करते रहेंगे और आज बचाया हुआ पैसा आगे चलकर बच्चे की पढ़ाई या रिटायरमेंट जैसे बड़े लक्ष्यों के काम आएगा। लेकिन जिंदगी हमेशा हमारी योजना के मुताबिक नहीं चलती।
जिस परिवार में लंबे समय के इन्वेस्टमेंट के लिए सिर्फ़ एक व्यक्ति पर निर्भरता हो, वहां किसी की अचानक मृत्यु से बड़ी आर्थिक समस्या पैदा हो सकती है। हो सकता है कि इन्वेस्टमेंट को अपने तय मूल्य तक पहुंचने के लिए ज़रूरी प्रीमियम मिलना बंद हो जाए। उदाहरण के लिए, अगर 20 सालों में लगभग 1 करोड़ रुपये जमा करने के लिए बनाया गया कोई प्लान कुछ ही सालों बाद योगदान (कंट्रीब्यूशन) रुकने की वजह से पटरी से उतर सकता है।
विवेक जैन, चीफ बिजनेस ऑफिसर, लाइफ इंश्योरेंस, पॉलिसीबाजार डॉट कॉम: “वेवर ऑफ़ प्रीमियम (WOP) लक्ष्य के अनुसार वित्तीय योजना बनाने में मददगार साबित हो सकता है। इसका मतलब है कि अगर प्रीमियम भरने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो बीमा कंपनी आगे के प्रीमियम खुद भरती रहती है। इससे परिवार की वित्तीय योजना बिना किसी रुकावट के जारी रहती है और तय लक्ष्य के लिए रखा पैसा सुरक्षित रहता है।”
महाराष्ट्र के 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल सुरेश का उदाहरण लें, जो अपने बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए एक बड़ा फंड बनाना चाहते हैं। लक्ष्य को पूरा करने के लिए 20 साल का समय होने पर, वह सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए हर महीने 10,000 रुपये का निवेश शुरू करते हैं। दो दशकों में 15% CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) मानकर, इस निवेश का लक्ष्य लगभग 1 करोड़ रुपये का फंड बनाना है।
हालांकि, इस निवेश योजना में एक रिस्क भी है। अगर दुर्भाग्य से निवेश की अवधि के दौरान राजेश की मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार को न केवल उनकी आय का नुकसान होगा, साथ ही तय लक्ष्य के लिए हर महीने किया जाने वाला निवेश जारी रखना भी मुश्किल हो सकता है।
यह बात तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब निवेश यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) के ज़रिए किया जाता है, जहां ‘वेवर ऑफ़ प्रीमियम’ सुविधा परिवार की फाइनेंशियल सुरक्षा को बनाए रखने में मदद करती है कि प्रीमियम भरने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी परिवार की वित्तीय योजना जारी रहे और निवेश में रुकावट न आए।



