
अगरबत्ती बोले’ अभियान शुरू किया
मुंबई दिव्यराष्ट्र:/ त्योहारी मौसम में भारतीय घरों में पूजा-पाठ, उत्सव और परंपराओं की खुशबू को खास अंदाज में सामने लाते हुए दुनिया की सबसे बड़ी अगरबत्ती निर्माता साइकिल प्योर अगरबत्ती ने महाराष्ट्र में ‘अगरबत्ती बोले’ अभियान शुरू किया है। अभियान का उद्देश्य यह बताना है कि अगरबत्ती केवल खुशबू का माध्यम नहीं, बल्कि यादों, भावनाओं और पीढ़ियों को जोड़ने वाली परंपरा भी है। अभियान की मूल सोच है कि अगरबत्ती किसी स्थान को केवल सुगंधित नहीं करती, बल्कि भावनाओं, यादों और परंपराओं को जीवंत करती है। इसके जरिए ब्रांड नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं के साथ अपना जुड़ाव मजबूत करने के साथ भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं में सुगंध के महत्व को भी रेखांकित कर रहा है। साइकिल प्योर अगरबत्ती के प्रबंध निदेशक अर्जुन रंगा ने कहा, “77 वर्षों से सुगंध हमारी यात्रा का अभिन्न हिस्सा रही है। अगरबत्ती केवल पूजा की आवश्यक वस्तु नहीं है, बल्कि यह त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और पीढ़ियों से साझा की जाने वाली यादों का हिस्सा है। ‘अगरबत्ती बोले’ के जरिए हम इसी भावनात्मक जुड़ाव का उत्सव मनाना चाहते हैं। बदलती उपभोक्ता पसंद के साथ आगे बढ़ते हुए हमारा प्रयास अपनी विरासत को बनाए रखते हुए आज की पीढ़ी के लिए प्रासंगिक अनुभव तैयार करना है।” उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बाजार है। कंपनी आधुनिक खुदरा बाजार, ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स मंचों के माध्यम से राज्य में अपनी पहुंच बढ़ा रही है। हाल ही में सात्विक के अधिग्रहण के साथ कंपनी ने भारत में संपूर्ण आध्यात्मिक और धार्मिक समाधान प्रदाता बनने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।अभियान के तहत कंपनी ने दसरा, यज्ञ और वुड्स वेरिएंट में बांस रहित सॉलिड धूप, रोज और जैस्मिन में मेदिनी जुड़वा कप सांबरानी तथा छह प्रीमियम सुगंध वाली रॉयल सीरीज पेश की है। कंपनी हर वर्ष 12 अरब से अधिक अगरबत्ती स्टिक का उत्पादन करती है और दुनिया भर के लाखों घरों तक आस्था की खुशबू पहुंचाती है। भारत में इसके 5,000 से अधिक वितरक और 5 लाख से अधिक खुदरा आउटलेट हैं तथा कंपनी 75 से अधिक देशों में मौजूद है। सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में एनआर फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और सामुदायिक कल्याण से जुड़ी पहलें संचालित करता है। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में महिला सशक्तीकरण पहल के तहत हजारों आदिवासी महिलाओं को अगरबत्ती निर्माण के माध्यम से आजीविका के अवसर मिले हैं। सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के तहत कंपनी पिछले 12 वर्षों से कार्बन न्यूट्रल है और हाल ही में प्लास्टिक न्यूट्रल भी बनी है।






