
दिव्यराष्ट्र, मुंबई: नोवो नॉर्डिस्क इंडिया ने आज भारत में अविक्ली (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्च करने की घोषणा की, जो टाइप 1 या टाइप 2 मधुमेह से जूझ रहे वयस्कों के लिए दुनिया की पहली साप्ताहिक बेसल इंसुलिन है। यह मधुमेह के साथ जी रहे लोगों के इंसुलिन उपचार को पूरी तरह बदलने जा रही है, यानी रोज़ाना लिए जाने की आवश्यकता से घटाकर हफ्ते में सिर्फ एक इंजेक्शन तक करने जा रही है, जिससे सालाना इंजेक्शन का बोझ 365 से घटकर केवल 52 रह जाएगा। यह कोई छोटा सा बदलाव नहीं है, बल्कि यह इस बात की बुनियादी पुनर्कल्पना है कि इंसुलिन लोगों की ज़िंदगी में किस तरह फिट होती है।
विक्रांत श्रोत्रिय, मैनेजिंग डायरेक्टर, नोवो नॉर्डिस्क इंडिया ने कहा अविक्ली का लॉन्च भारत में मधुमेह की देखभाल के लिए एक ऐतिहासिक पल है। एक सदी से भी ज़्यादा समय से नोवो नॉर्डिस्क का एक ही सपना रहा है, इंसुलिन थेरेपी को मरीज़ों के लिए आसान, सुरक्षित और ज़्यादा सुलभ बनाना। साप्ताहिक खुराक हमारे क्षेत्र में लंबे समय से एक चाहत रही है। आज यह भारत के लिए हकीकत बन चुकी है। हमें भरोसा है कि अविक्ली इंसुलिन शुरू करने की राह में आने वाली मानसिक और शारीरिक बाधाओं को कम करेगी, और आख़िर में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को बेहतर नियंत्रण और बेहतर जीवन गुणवत्ता हासिल करने में मदद करेगी।
डॉ. एस.के. वांगनू, सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट, अपोलो सेंटर फॉर ओबेसिटी, डायबिटीज़ एंड एंडोक्राइनोलॉजी (एकोड), इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली ने कहा बहुत से मरीज़ों के लिए मधुमेह प्रबंधन की नींव आज भी इंसुलिन ही है, लेकिन इसे शुरू करने में देरी करना और इसे नियमित रूप से न लेना, क्लिनिकल प्रैक्टिस में नतीजों को कमज़ोर करता रहा है। जो नवाचार उपचार के अनुभव को सचमुच आसान बना देते हैं, वे मरीज़ों के व्यवहार में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। साप्ताहिक बेसल इंसुलिन, इंसुलिन शुरू करने से जुड़े डर को कम कर सकती है, और डॉक्टरों को समय पर उपचार को लेकर मरीज़ों से ज़्यादा असरदार बातचीत करने में मदद कर सकती है।
ऑनवर्ड्स–1 क्लिनिकल कार्यक्रम में अविक्ली ने रोज़ाना ली जाने वाली ग्लार्जिन यू100 की तुलना में एचबीए1सी में बेहतर कमी और टाइम इन रेंज में बेहतर नतीजे दिए। टाइप 2 मधुमेह से जूझ रहे ज़्यादा लोग, बिना हाइपोग्लाइसीमिया (रक्त शर्करा के अत्यधिक गिरने) के एचबीए1सी को 7प्रतिशत से नीचे ले जाने में सफल रहे। टाइम इन रेंज, जो एचबीए1सी का एक तेज़ी से अहम पूरक बनकर सामने आया है, वह भी अविक्ली के साथ काफी बेहतर हुआ, जिससे मरीज़ों को दिन भर बेहतर नियंत्रण मिला।




