
गायों की रक्षा, मातृभूमि की सेवा के लिए अपना बलिदान दिया
भीनमाल, दिव्यराष्ट्र/। तोलजी जुंजार मामाजी पश्चिमी राजस्थान, विशेष रूप से जालोर और पाली क्षेत्र के एक लोक देवता हैं। उन्हें साहस, त्याग और वीरता का प्रतीक माना जाता है। जुंजार जी वे लोक देवता होते हैं जिन्होंने गायों की रक्षा, मातृभूमि की सेवा या महिलाओं के सम्मान के लिए युद्ध में लड़ते हुए अपना बलिदान दिया हो। राजस्थान में कई स्थानों पर मामाजी और जुंजार जी के मंदिर (थान) बने हुए हैं, जहाँ श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर घोड़े (मिट्टी के घुड़ले) चढ़ाते हैं। स्थानीय संस्कृति में उनके वीरतापूर्ण कार्यों के लिए कई राजस्थानी भजन गाए जाते हैं, जिनमें उन्हें ‘भक्तों का रखवाला’ और ‘दुखियों का दाता’ कहा गया है। इनकी पूजा विशेष रूप से चैत्र और भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तिथियों पर बड़े उत्साह के साथ की जाती है । राजस्थान, जो अपनी वीरभूमि और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, वीर मामाजी महाराज की तप, त्याग और भक्ति को समर्पित यह पर्व राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के ग्रामीण इलाकों में भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है । तेरस के अवसर पर जालोर जिले के खाण्डादेवल गांव में वीर मामाजी महाराज का भव्य मेला लगता है । इस मेले में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु आते हैं, जिनकी आस्था का सैलाब देखते ही बनता है । वीर मामाजी का जन्म राजस्थान के जालोर जिले के खाण्डादेवल गांव में एक राजपुरोहित परिवार में हुआ था । ऐसा माना जाता है कि उनकी माता को भगवान शिव और नाग-देवता के आशीर्वाद से मामाजी की प्राप्ति हुई थी । बचपन से ही उनका चेहरा तेज से दमकता था । मामाजी ने अपने जीवन में गौ-रक्षा और नारी सम्मान के लिए कई बलिदान दिए । एक बार जब वे खाण्डादेवल की गायों के लिए गौचर बचाने जा रहे थे, तब उन्होंने गायों के लिए कई दिनों तक अन्न जल का त्याग कर दिया । वीर मामाजी ने उसे वचन दिया कि गायों के लिए गौचर बचाने के बाद वे लौटकर आएंगे, तब उन्होंने स्वयं का सर काट दिया ।
* भव्य गैर नृत्य का आयोजन, उमड़ा जन समूह*
गैर प्रथा खत्म ना हो जाए, इसलिए गांव में एक सामाजिक संगठन ने बीते कई सालों से एक बीड़ा उठा रखा है। तोलजी जुंजार मामाजी सेवा समिति की ओर से हर होली महोत्सव को लेकर गांव में गैर का आयोजन किया जाता है। वैसे देखा जाए तो वर्तमान समय में गैर नृत्य गांवों से भी विलुप्त होती जा रही है। बड़ी बात यह है कि समाज सेवी संगठन ने गांव में भी इस प्रथा को कायम रखने के लिए अथक प्रयास किए हैं।तोलजी जुंजार मामाजी सेवा समिति के तत्वाधान में विशाल भव्य गैर नृत्य का आयोजन किया गया। जिसमें पारंपरिक वेशभूषा से सैकड़ों की संख्या में गेरियों ने गैर नृत्य का आनंद लिया। इस अवसर पर कई वक्ताओ ने कहा कि भारतीय संस्कृति का यह एक रूप है, इससे लोगों में प्रेम सद्भावना बनी रहती है। जिसमें गांव ही नहीं, आसपास गांवों से भी लोग गैर नाचने के लिए आते हैं। गैर नृत्य देखने के लिए शहर से भारी भीड़ उमड़ पड़ी एवं आस-पास के दूर दराज के क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में महिलाओं एवं बालिकाओं ने भाग लिया ।
खनन करते समय खाण्डादेवल ग्राम में गौमाता की निकली मूर्ति*
निकटवर्ती ग्राम खाण्डादेवल के ओरण में तोलजी जुंजार मामाजी मंदिर के पास पडत भूमि में खनन करने पर गौमाता की मूर्ति निकली है। खाण्डादेवल के गौ भक्त सुरेश राजपुरोहित ने बताया कि गौमाता का चहरा दिखाई दे रहा है। राजपुरोहित ने कहा कि यहां पर जुंजार मामाजी की बहुत मान्यता है। मान्यता के अनुसार यहां पर आने वाले की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मूर्ति निकलने की खबर मिलने पर इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामवासी भी एत्रकित हुए। इस दौरान राजु राजपुरोहित, खेताराम राजपुरोहित, भोमाराम राणा, निलेशकुमार ढोली, राजुभाई, भंवरलाल पुरोहित, बगाराम भील सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने जय कारे के साथ गौमाता की पूजा की।





