
पूर्व पीआरओ भूपेंद्र सिंह शेखावत के अनूठे प्रयास
विश्वविद्यालयकी भूमि आज भी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के जन्मदिवस पर राज्य के विभिन्न सामाजिक राजनैतिक संगठनों ने उन्हें बधाई दी है । वही श्री बिशनसिंह शेखावत शोध एव शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष डॉ .भूपेंद्र सिंह शेखावत ने कुछ अलग ही अंदाज में दिया कुमारी को बधाई देते हुए एक पत्र लिखा है।

पत्र के अनुसार शेखावत ने कहा है कि पूर्व में आप से हुई विस्तृत चर्चा के क्रम में आपके ध्यान में पुन एक गंभीर विषय पर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं , कि राज्य के सबसे बड़े उच्च शिक्षण संस्थान राजस्थान विश्वविद्यालय के लिए आपके पूर्वजों द्वारा ही इसकी स्थापना के समय मोती डूंगरी से लगता एक विशाल भूभाग व वर्ष 1961 में राज्य सरकार द्वारा इस विश्वविद्यालय के विस्तार को दृष्टिगत रखते हुए 157 एकड़ भूमि आवंटित की गई , इसे एक दुर्भाग्य जनक पहलू ही कहा जा सकता है कि इन दोनों प्रशासनिक आवंटन के पश्चात भी लगभग 68 सालों तक इस भूमि को मुख्यत विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीर उदासीनता के चलते राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज न होने से इसका स्वामित्व आधिकारिक रूप से राजस्थान विश्वविद्यालय को नहीं मिल पाया, इस तकनीकी राजस्व एवं प्रशासनिक त्रुटि के चलते इस विशाल भूभाग पर अनेक भू माफियाओं को इस भूमि पर अतिक्रमण का एक खुला अवसर प्रदान किया,
इन अतिक्रमणों के विरुद्ध विश्वविद्यालय जनसंपर्क कार्यालय द्वारा प्रभावशाली भूमाफियाओं की विपरीत व्यक्तिगत कार्यवाहियों का सामना करते हुए विभिन्न संस्थाओं, संगठनो, विश्वविद्यालय का अत्यधिक सम्मान करने वाले पूर्व छात्रों व मीडिया संस्थानों के सहयोग से वर्ष 2005 में एक व्यापक अभियान प्रारंभ किया गया, यह कहते हुए मुझे कोई हिचकिचाहट नहीं है कि इस अभियान के चलते राज्य सरकार द्वारा उच्च स्तर पर इस संपूर्ण भूमि का आधुनिक तकनीक के आधार पर एक व्यापक सर्वे प्रारंभ किया गया , इस सर्वे के आधार पर वर्ष 2015 में पहली बार इस अभियान को एक बड़ी सफलता मिली, जब जिला प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय मुख्य परिसर से लगती लगभग 202 एकड़ भूमि को आधिकारिक रूप से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर, इसका स्वामित्व विश्वविद्यालय को दिया गया, कुछ अन्य भूभाग का स्वामित्व भी इस दौरान विश्वविद्यालय को मिला है
शेखावत के अनुसार लंबे समय बाद भी राजस्व एवं प्रशासनिक तकनीकी पहलुओं के चलते अभी तक दो चरणों में आवंटित इस भूमि का पूरा स्वामित्व विश्वविद्यालय को नहीं मिल पाया है, विश्वविद्यालय को आवंटित इस भूमिका एक बड़ा भाग अभी भी विश्वविद्यालय के स्वामित्व से वंचित है, निश्चित रूप से इसका प्रमुख कारण प्रभावशाली माफियाओं के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीनता प्रमुख रूप से रहा है
अधिक विस्तार में न जाकर वर्तमान में इस विषय से जुड़े दो प्रमुख बिंदुओं पर तुरंत प्रभाव से हस्तक्षेप हो।
1 इस विश्वविद्यालय को वर्ष 1947 में जयपुर राज परिवार द्वारा प्रदान की गई भूमि में से लगभग 13 एकड़ भूमि पर लंबे समय पूर्व राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीनता के चलते अनधिकृत रूप से काबिज होकर कुछ प्रभावशाली लोगों को हाउसिंग कॉलोनी के रूप में आवासीय प्रयोजन के लिए आवंटन कर दिया, यह तथ्य प्रशासनिक सर्वे में स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आया है, इस भूमि का वर्तमान में बाजार मूल्य लगभग 1000 करोड रुपए के करीब अनुमानित है, एक दृष्टि से राजस्थान विश्वविद्यालय की पवित्र भूमि पर अनधिकृत रूप से हाउसिंग बोर्ड का यह अतिक्रमण का कृत्य निश्चित रूप से गंभीर आपराधिक श्रेणी के तहत माना जा सकता है, हाउसिंग बोर्ड एक प्रॉफिट मेकिंग संस्थान है , हाउसिंग बोर्ड के द्वारा किए गए इस अनुचित कृत्य की एवज में आज राजस्थान विश्वविद्यालय एक उचित मुआवजे का नियम अनुसार हकदार है, इस दृष्टि से राजस्थान विश्वविद्यालय को वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर उचित मुआवजा प्रदान किया जाना चाहिए, इस विषय में आपके स्तर पर तुरंत हस्तक्षेप आवश्यक है
2 राजस्थान विश्वविद्यालय के जे एल एन मार्ग पर यूजीसी की सहायता से बने एक गेस्ट हाउस पर लगभग 30 सालों से राजस्थान पुलिस अनधिकृत रूपसे काबिज है, सर्वे प्रक्रिया से जुड़े एक अधिकारी ने अपना नाम सार्वजनिक न किए जाने की शर्त पर यह जानकारी दी है कि पिछले दिनों हुए प्रशासनिक सर्वे के दौरान बड़े भूभाग पर बने इस विशाल भवन को राजस्थान विश्वविद्यालय के अधिकार से निकालकर स्थाई रूप से राजस्थान पुलिस के अधिकार में दिए जाने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नही कहीं जा सकती है, यहां यह उल्लेख करना भी समीचीन होगा कि इस कीमती भवन जिसका बाजार मूल्य लगभग 800 से 1000 करोड रुपए के लगभग है, को राजस्व एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत विश्वविद्यालय अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है , यदि ऐसी कोई कार्यवाही राज्य सरकार के स्तर पर विचाराधीन है तो उसे तुरंत प्रभाव से आपके स्तर पर निरस्त किए जाने की कार्यवाही किए जाने के निर्देश प्रदान करवावे , मैं यह विश्वास के साथ कह सकता हूं कि निश्चित रूप से आपका यह कदम इस ऐतिहासिक राजस्थान विश्वविद्यालय के स्वर्णिम इतिहास में आपके पूर्वजों की तरह ही आपके इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए याद किया जाएगा



