
दिव्यराष्ट्र, अजमेर: देश में मेडिको-लीगल मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, खासकर टियर-II और टियर-III शहरों में, जहां निजी अस्पताल आमतौर पर मरीजों के लिए पहले संपर्क बिंदु होते हैं। कई मामलों में रेफरल प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न गलतफहमियां और निजी व सरकारी अस्पतालों की अलग-अलग जिम्मेदारियां विवादों का कारण बन रही हैं।
इसी कड़ी में अजमेर के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. लोहित शिवाशिष से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें मरीज के परिवार ने इलाज के दौरान आई जटिलताओं के बाद 11 लाख के मुआवजे की मांग की। क्लेम के बाद की स्थिति पर बात करते हुए डॉ. शिवाशिष ने बताया कि उन्होंने तुरंत पॉलिसीबाज़ार फॉर बिज़नेस से संपर्क किया। उन्होंने कहा, “क्लेम की जानकारी मिलते ही उन्होंने पीबीएफबी की टीम ने हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन किया। ऐसे समय में घबराना स्वाभाविक है, लेकिन उनकी टीम ने मामले को आसानी से संभालने में बड़ी मदद की।”
यह क्लेम तब किया गया था जब एक मरीज हैप्पी लाइफ मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में देरी से पहुंचा और उसकी स्थिति गंभीर होने पर उसे सरकारी अस्पताल रेफर करना पड़ा। चूंकि सरकारी अस्पताल ऐसे मामलों में क्लेम नहीं लेते, इसलिए परिवार ने डॉक्टर और निजी संस्था पर ही जिम्मेदारी तय की।
डॉ. शिवाशिष का कहना है कि आज डॉक्टरों के लिए इंडेम्निटी इंश्योरेंस बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा, “आजकल अचानक आने वाली कानूनी परेशानियां डॉक्टरों के काम का हिस्सा बन गई हैं। ऐसे में सही इंश्योरेंस मदद करता है और कागज़ी काम का बोझ कम करता है, जिससे डॉक्टर अपने इलाज और मरीजों पर ध्यान दे पाते हैं।”
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे बढ़ते मामलों से साफ है कि आपातकाल में मरीजों को रेफर करने से जुड़े नियमों को और स्पष्ट करने की जरूरत है। साथ ही, विवादों को सुलझाने की व्यवस्था मजबूत करने और डॉक्टरों व मरीजों—दोनों के बीच जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है।
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, मरीजों की बढ़ती जागरूकता, ऑनलाइन शिकायत सिस्टम और कानूनी प्रक्रिया आसान होने की वजह से अब देशभर के डॉक्टर बड़ी संख्या में प्रोफेशनल इंडेम्निटी इंश्योरेंस ले रहे हैं, ताकि खुद को ऐसे मामलों से बचा सकें।
देशभर में मेडिको-लीगल मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका मतलब है कि डॉक्टरों के लिए कानूनी जोखिम अब आम बात हो गई है। ऐसी स्थिति में प्रोफेशनल इंडेम्निटी इंश्योरेंस बेहद मददगार साबित होता है, यह डॉक्टरों को अचानक आने वाले कानूनी मामलों से सुरक्षा देता है और उन्हें बिना किसी डर या दबाव के अपने मरीजों का सही इलाज करने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।जयंत पाराशर,बिज़नेस यूनिट हेड – डॉक्टरों के लिए प्रोफेशनल इंडेम्निटी
पॉलिसीबाज़ार फॉर बिज़नेस की ओर से बताया गया कि लिटिगेशन के बढ़ते जोखिमों के चलते मेडिकल प्रोफेशनल्स तेजी से इंडेम्निटी इंश्योरेंस अपना रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा, “हमारा प्रयास है कि जब डॉक्टर पर कोई दावा आए तो हम उन्हें तेज़, विश्वसनीय और व्यावहारिक सहायता प्रदान कर सकें।” विशेषज्ञों के अनुसार, केवल दावे का भुगतान ही नहीं, बल्कि जांच के दौरान प्रक्रियागत मार्गदर्शन, दस्तावेज़ी सहायता और विशेषज्ञ सहयोग की वजह से भी डॉक्टर इस बीमा पर निर्भर हो रहे हैं





