सिर्फ 26% को भरोसा कि उनकी बचत 10 साल या उससे अधिक चलेगी: एक्सिस मैक्स लाइफ का भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र* एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड ने कांतार के साथ मिलकर किए गए अपने इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी (आइरिस) के छठे संस्करण के नॉर्थ जोन के नतीजे जारी किए हैं। कांतार दुनिया की प्रमुख मार्केटिंग डाटा और एनालिटिक्स कंपनियों में से एक है। अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि उत्तर भारत में रिटायरमेंट से जुड़ी आकांक्षाओं और उसे लेकर तैयारियों के बीच अंतर बढ़ रहा है। एक ओर ज्यादा से ज्यादा लोग रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हैं और कम उम्र में वित्तीय रूप से आजाद होना चाहते हैं, तो दूसरी ओर रिटायरमेंट फंड की अवधि, सेहत और भावनात्मक कल्याण से जुड़ी चिंताएं उनकी समग्र तैयारी को प्रभावित कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड को पहले मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के नाम से जाना जाता था।
उत्तर भारत का भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0 स्कोर 47 रहा, जबकि आइरिस 5.0 में यह 48 था। उत्तर भारत का स्कोर राष्ट्रीय औसत 49 से नीचे रहा। यह सभी चार जोन में सबसे कम है। इस क्षेत्र का फाइनेंशियल प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 48 से बढ़कर 50 हो गया, हालांकि यह अब भी 52 के राष्ट्रीय औसत से नीचे है। वहीं, हेल्थ प्रिपेयर्डनेस स्कोर 46 से घटकर 44 और इमोशनल प्रिपेयर्डनेस स्कोर 55 से घटकर 54 पर आ गया है।
इन चुनौतियों के बावजूद, रिटायरमेंट को लेकर लोगों की आकांक्षाएं मजबूत बनी हुई हैं। अगर वित्तीय जरूरतें पूरी हो जाएं, तो उत्तर भारत के 74 प्रतिशत लोग रिटायरमेंट की पारंपरिक उम्र से पहले ही रिटायर होना चाहते हैं। इनमें 49 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो 50 वर्ष की उम्र से पहले ही वित्तीय रूप से आजाद होकर रिटायर हो जाना चाहते हैं। हालांकि, अध्ययन में शामिल लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने लक्षित रिटायरमेंट फंड का औसतन केवल 26 प्रतिशत ही जमा किया है। वहीं ऐसे लोगों की संख्या 38 प्रतिशत से घटकर 26 प्रतिशत रह गई है, जिन्हें उम्मीद है कि उनकी बचत रिटायरमेंट के बाद कम से कम एक दशक तक चलेगी
एक्सिस मैक्स लाइफ के चीफ बिजनेस ऑफिसर एवं हेड ऑफ रिटायरमेंट अनुराग गुप्ता ने कहा, “भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0 के नतीजे उत्तर भारत के रिटायरमेंट आउटलुक की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करते हैं। यह क्षेत्र वित्तीय, स्वास्थ्य और भावनात्मक तैयारियों के मामले में अब भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। रिटायरमेंट फंड के लंबे समय तक चलने को लेकर भरोसे में आई कमी इस बात को और भी जरूरी बनाती है कि लोग समय रहते निवेश शुरू करें और दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के लिए नियमित रूप से निवेश करते रहें। रिटायरमेंट की तैयारी केवल फाइनेंस तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें शारीरिक स्वास्थ्य और मजबूत सोशल सपोर्ट सिस्टम भी शामिल होना चाहिए। रिटायरमेंट की योजना बनाने के लिए समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देना जरूरी होगा, ताकि लोग अपने जीवन के बाद के वर्षों में अधिक स्वतंत्रता, सुरक्षा और मानसिक शांति हासिल कर सकें।”
नॉर्थ जोन – इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी 6.0 के प्रमुख निष्कर्ष
जल्दी रिटायर होने की चाहत बढ़ी, लेकिन वित्तीय तैयारी में अभी सुधार की जरूरत*
उत्तर भारत के लोग रिटायरमेंट के लिए निवेश करने के मामले में अधिक भागीदारी दिखा रहे हैं। यहां 68 प्रतिशत लोगों ने रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू कर दिया है, जबकि आइरिस 5.0 में यह आंकड़ा 64 प्रतिशत था। हालांकि, इस मामले में उत्तर भारत अब भी 70 प्रतिशत के राष्ट्रीय आंकड़े से थोड़ा पीछे है।
जल्दी रिटायरमेंट की योजना को लेकर लोगों की सोच में सुधार हो रहा है। हालांकि उत्तर भारत अन्य क्षेत्रों से अब भी पीछे है। केवल 39 प्रतिशत लोगों का मानना है कि कमाई शुरू करते ही रिटायरमेंट की योजना बनानी शुरू कर देनी चाहिए। पिछले साल यह आंकड़ा 35 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 50 प्रतिशत है। उत्तर भारत के लोगों के अनुसार, रिटायरमेंट के लिए बचत के बारे में सोचना शुरू करने की सही उम्र लगभग 33 वर्ष है, जबकि राष्ट्रीय औसत 31 वर्ष है।
रिटायरमेंट के लिए कितने फंड की जरूरत होगी, इस बारे में जागरूकता में भी कमी आई है। 64 प्रतिशत लोगों को पता है कि रिटायरमेंट के दौरान अपनी मौजूदा जीवनशैली बनाए रखने के लिए उन्हें कितनी रकम की जरूरत होगी। आइरिस 5.0 में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत था। हालांकि, यह अब भी 61 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
रिटायरमेंट को लेकर उम्मीदें बढ़ीं, लेकिन फंड कितने समय तक चलेगा, इसे लेकर चिंता गहराई*
निवेश के मामले में अधिक भागीदारी के बावजूद, रिटायरमेंट फंड जमा करना अब भी एक चुनौती बना हुआ है। उत्तर भारत के लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने लक्षित रिटायरमेंट फंड का औसतन 26 प्रतिशत जमा कर लिया है। आइरिस 5.0 में यह आंकड़ा 27 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय औसत 28 प्रतिशत है।
रिटायरमेंट फंड कितने समय तक चलेगा, इसे लेकर लोगों का भरोसा काफी कमजोर हुआ है। केवल 26 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि उनकी बचत रिटायरमेंट के बाद 10 साल या उससे अधिक समय तक चलेगी, जबकि पिछले साल ऐसी उम्मीद रखने वाले 38 प्रतिशत थे। वहीं, आरामदायक रिटायरमेंट के लिए जरूरी फंड को लेकर लोगों की सोच में भी बदलाव आया है। अब 32 प्रतिशत लोगों का मानना है कि उन्हें 1 करोड़ रुपये से अधिक की जरूरत होगी। आइरिस 5.0 में ऐसा मानने वाले 21 प्रतिशत थे। सभी जोन की तुलना में उत्तर भारत का यह अनुपात सबसे अधिक है।
सेहत और भावनात्मक चिंताएं रिटायरमेंट की तैयारी को प्रभावित कर रही हैं*
उत्तर भारत का हेल्थ प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 46 से घटकर 44 रह गया है, जो सभी जोन में सबसे कम है। केवल 70 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में स्वस्थ और फिट रहेंगे। आइरिस 5.0 में यह आंकड़ा 74 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 75 प्रतिशत है।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराने वालों की संख्या में भी कमी आई है। 61 प्रतिशत लोग नियमित रूप से या कभी-कभी प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप कराते हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 63 प्रतिशत था। नियमित शारीरिक गतिविधियों में शामिल रहने वाले लोगों का अनुपात 39 प्रतिशत है, जो 41 प्रतिशत के राष्ट्रीय आंकड़े से थोड़ा कम है। हालांकि, जिम और अन्य शारीरिक गतिविधियों के लिए फिटनेस सब्सक्रिप्शन लेने के मामले में उत्तर भारत सभी जोन में सबसे आगे है। यहां यह आंकड़ा 29 प्रतिशत है।
भावनात्मक तैयारी भी चिंता का एक विषय बनी हुई है। उत्तर भारत के 81 प्रतिशत लोगों को रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में अकेलेपन की चिंता है। आइरिस 5.0 में यह आंकड़ा 79 प्रतिशत था। यह सभी जोन में सबसे अधिक है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी चिंता जताने वाले 74 प्रतिशत हैं। वहीं, परिवार और दोस्तों से सहयोग मिलने को लेकर सुरक्षित महसूस करने वाले लोगों का अनुपात 88 प्रतिशत से घटकर 84 प्रतिशत रह गया है।
बाहरी परिस्थितियों को लेकर भी लोगों की चिंताएं काफी ज्यादा हैं। 85 प्रतिशत लोगों को चिंता है कि बदलते पर्यावरणीय हालात शांति से रिटायरमेंट जीने के उनके सपने को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, 83 प्रतिशत लोगों ने भू-राजनीतिक तनावों को लेकर चिंता जताई है। यह सभी जोन में सबसे अधिक है और 79 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से भी ऊपर है।