जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ जयपुर की समृद्ध संगीत परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले युवा संगीतकार अंकित भट्ट आज संगीत जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। उनके लिए संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि साधना और जीवन का उद्देश्य है। संगीत के प्रति उनकी निष्ठा, समर्पण और निरंतर अभ्यास उन्हें युवा पीढ़ी के प्रतिभाशाली संगीतकारों में विशेष स्थान दिलाता है। अपने परिवार की गौरवशाली संगीत विरासत को आगे बढ़ाने का उनका जुनून उनके प्रत्येक कार्य में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनकी साधना और रचनात्मकता में भविष्य की अनेक संभावनाओं का उज्ज्वल स्वरूप झलकता है।
अंकित भट्ट ने अब तक लगभग दो दर्जन संगीत रचनाओं का संगीत निर्देशन एवं संयोजन किया है। उनके निर्देशन में तैयार हुई इन रचनाओं को अनेक प्रतिभाशाली गायकों ने स्वर दिए हैं, जिनमें डॉ. गौरव जैन, सुमंत मुखर्जी, दीपशिखा जैन, संजय रायज़ादा, वीणा मोदानी, बृजेश व्यास तथा स्वयं अंकित भट्ट शामिल हैं। उनकी रचनाओं में भारतीय संगीत की मधुरता और आधुनिक प्रस्तुति का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
शास्त्रीय संगीत के अनुशासित साधक अंकित भट्ट ने गायन एवं तबला विषय में प्रभाकर, विशारद तथा स्नातक की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। वे गुरु-शिष्य परंपरा के सच्चे संवाहक हैं और नियमित रूप से संगीत साधना में संलग्न रहते हैं। अपने पिता एवं सुप्रसिद्ध संगीत गुरु पंडित आलोक भट्ट के सान्निध्य में वे गायन तथा वीणा वादन का गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उनकी कला निरंतर परिष्कृत और समृद्ध हो रही है।
देश और विदेश के अनेक मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके अंकित भट्ट जयपुर, दिल्ली, दुबई सहित विभिन्न महानगरों में सफल प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। उन्हें कल्पना संगीत साधक पुरस्कार तथा गुरु रघुवीर शरण पुरस्कार (अलवर) जैसे सम्मान प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त, एक लाख से अधिक साधकों की सहभागिता वाले सामूहिक वंदे मातरम् प्रस्तुतियों में उन्होंने अपने गुरु एवं पिता पंडित आलोक भट्ट के साथ सह-निर्देशक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। युवा ऊर्जा, शास्त्रीय अनुशासन और रचनात्मक दृष्टि का यह संगम अंकित भट्ट को संगीत जगत का एक उभरता हुआ और प्रेरणादायी नाम बनाता है।
संगीत सृजन और प्रस्तुतियों के साथ-साथ अंकित भट्ट संगीत शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे विभिन्न कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत से जोड़ने का प्रयास करते हैं। उनका मानना है कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है। इसी सोच के साथ वे संगीत की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
संगीत वह साधना है जो आत्मा को शांति और जीवन को अर्थ देती है।