तूं ही मेरा चंदन वंदन
डर के हिचकोलों में स्पंदन
सारे तूफां एक तरफ थे
अंधियारों के खौफ बहुत थे
तेरी ममता तेरी ऊर्जा
के समक्ष वो क्षुद्र बहुत थे …
जीवन मृत्यु खेल ईश का
चित्रगुप्त का लेख खुला था!
ये दुनिया थी असहाय..पर
तेरी बांहों में ज़ोर बहुत था!
थे अजस्र तेरे अश्रु-अक्ष मां!
वो अनंत जलराशि अल्प,
दुनिया का कोलाहल बोना
तेरी उस पुकार के मध्य!!
(अंत में बालक ईश्वर से प्रार्थना करते हुए)*
जन्म भले कितने ही देना
मां वही चाहिए,गोद वही!
यक्ष प्रश्न की फौज खड़ी है
इनके हल देना तो सही।
दिव्य राष्ट्र के लिए श्रीलेखा शर्मा , सयुक्त आयुक्त,स्टेट टैक्स,जयपुर,राजस्थान