• कुल क्रेडिट में आठ प्रोडक्ट्स का योगदान 83% है, जिसमें कमर्शियल लोन की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा (30%) है
• पोर्टफोलियो का बढ़ना रिटेल और छोटे बिज़नेस एक्टिविटी में बढ़ोतरी को दिखाता है, साथ ही एसेट-क्वालिटी मेट्रिक्स में भी सुधार हो रहा है
मुंबई, दिव्यराष्ट्र * अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक (UCBs) भारत के क्रेडिट इकोसिस्टम में अपनी स्थिति लगातार मज़बूत कर रहे हैं। उनके बैलेंस शीट में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है, एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है, और रिटेल तथा छोटे बिज़नेस, दोनों सेगमेंट में मांग लगातार बढ़ रही है।
नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NUCFDC) और ट्रांसयूनियन सिबिल के जॉइंट पब्लिकेशन, सहकार ट्रेंड्स के अनुसार सितंबर 2025 तक UCBs का आउटस्टैंडिंग क्रेडिट बैलेंस ₹3.4 लाख करोड़ रहा, जो पिछले पांच साल में लगभग 1.9 गुना बढ़ गया है।
हालांकि यूसीबी (UCBs) का कुल इंडस्ट्री क्रेडिट में हिस्सा अभी भी लगभग 1.8% के आसपास सीमित है, लेकिन आंकड़े संकेत देते हैं कि यह सेक्टर बदलती उधारकर्ता प्रोफाइल, प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों तथा नियामकीय अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है।
ट्रांसयूनियन सिबिल के MD एवं CEO, भावेश जैन ने कहा, “UCBs भारत के व्यापक हिस्सों तक अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं और बड़े शहरी केंद्रों से आगे बढ़कर अर्ध-शहरी और उभरते क्षेत्रों में घरों तथा छोटे व्यवसायों को फॉर्मल क्रेडिट उपलब्ध करा रहे हैं। कम्युनिटीज़ के नज़दीक होने के कारण, ये बैंक ऐसे ग्राहकों को लोन दे पाते हैं जहाँ लोकल कॉन्टेक्स्ट और रिश्ते मायने रखते हैं। इससे भारत के ज़्यादा-से-ज़्यादा लोगों को फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम से जोड़ने में मदद मिल रही है। जैसे-जैसे ये बैंक रिटेल और छोटे व्यवसाय ऋण में अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं, वैसे-वैसे क्रेडिट क्वालिटी बनाए रखते हुए वित्तीय पहुंच का विस्तार करना उनकी एक अहम भूमिका बनता जा रहा है, जिससे अधिक संतुलित और समावेशी आर्थिक भागीदारी को समर्थन मिलेगा।
NUCFDC के CEO, प्रभात चतुर्वेदी ने कहा, “UCBs के बढ़ते क्रेडिट विस्तार से उधारकर्ताओं के मजबूत भरोसे का संकेत मिलता है, खासकर अर्ध-शहरी और उभरते क्षेत्रों में, जहां फॉर्मल क्रेडिट का आसानी से उपलब्ध होना बहुत ज़रूरी है। जैसे-जैसे ये बैंक अपने संचालन का दायरा बढ़ा रहे हैं, जिसे देखते हुए उन्हें अपनी इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी को मज़बूत करने, कामकाज के तरीके को बेहतर बनाने और मज़बूत गवर्नेंस फ्रेमवर्क तैयार करने पर जोर देना होगा। इस बदलाव के दौरान UCBs का साथ देना ज़रूरी है, ताकि उनकी वृद्धि व्यापक वित्तीय भागीदारी और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता में सार्थक योगदान देती रहे।”
UCBs के लैंडिंग में आठ प्रोडक्ट्स का ज़्यादा योगदान*
UCB की बैलेंस शीट में कमर्शियल लोन, हाउसिंग लोन, रिटेल बिज़नेस लोन, प्रॉपर्टी पर लोन, गोल्ड लोन, पर्सनल लोन, ऑटो लोन और बैंक डिपॉज़िट पर लोन सबसे ज़्यादा हैं। सितंबर 2025 तक, UCBs के कुल आउटस्टैंडिंग बैलेंस में इन प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी लगभग 83% थी, जिससे पता चलता है कि वे अभी भी कोलेटरल के बदले रिटेल लोन देने और छोटे बिजनेस को क्रेडिट उपलब्ध कराने पर ज़्यादा जोर दे रहे हैं।
UCBs में हाउसिंग लोन की औसत रकम ₹23 लाख के करीब है, जो हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के ₹26 लाख के मुकाबले थोड़ी कम है। गोल्ड लोन की बात करें, तो UCBs के लिए औसत रकम ₹1.3 लाख है, जबकि PSU बैंकों के लिए यह ₹2.3 लाख है। इसके विपरीत, UCBs में कमर्शियल लोन की औसत रकम लगभग ₹50 लाख है, जो पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSUs) के ₹37 लाख से ज़्यादा है। वहीं, पर्सनल लोन के मामले में UCBs के लिए औसत रकम लगभग ₹4.7 है, जबकि नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए यह ₹2 लाख है।
तालिका 1: UCBs में मुख्य प्रोडक्ट्स की ग्रोथ और बैलेंस में हिस्सेदारी (पांच साल का ट्रेंड)
Product 5 Years CAGR in Balances (Sep ‘25 vs Sept ‘20) % Share in Balances
(Sept ‘25)
Commercial Loan* 4% 30%
Housing Loan 19% 14%
Retail Business Loan 19% 12%
Loan Against Property 17% 10%
Personal Loan 17% 6%
Gold Loan 49% 5%
Auto Loan 38% 4%
Loan Against Bank Deposits 20% 2%
*All Commercial fund-based loans (working capital -term loan) with entity with total exposure of 100 Cr is considered.