दिव्यराष्ट्र, मुंबई: देश की स्वतंत्रता, सामाजिक पुनर्जागरण और नैतिक मूल्यों की मजबूत आधारशिला रखने वाली पद्म विभूषण श्रीमती जानकीदेवी बजाज की 133वीं जयंती के अवसर पर बजाज समूह के संरक्षक श्री शिशिर बजाज ने अपनी दादी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उन्हें सादगी, साहस और निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा की जीवंत प्रतिमूर्ति बताते हुए उनके जीवन को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत कहा।
श्रीमती जानकीदेवी बजाज के स्मरण में जारी संदेश में श्री शिशिर बजाज ने कहा, “मेरी दादी जानकीदेवी बजाज का जीवन अनुशासन, करुणा और गांधीवादी मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से ओतप्रोत था। महात्मा गांधी से प्रेरित होकर उन्होंने स्वदेशी, खादी और सादे जीवन को अपनाया और स्वयं को समाज, नारी सशक्तिकरण और ग्रामीण उत्थान की सेवा में समर्पित कर दिया। मेरे पुत्र कुशाग्र को उनके स्नेह की गोद में खेलने का सौभाग्य मिला—यह हमारे परिवार का गौरव है। उनकी मौन शक्ति और नैतिक स्पष्टता आज भी बजाज समूह के ‘नैशन बिल्डिंग’ के दर्शन को दिशा देती है।”
7 जनवरी 1893 को मध्य प्रदेश के जावरा में जन्मीं जानकीदेवी जी का जीवन बाल्यावस्था में ही जमनालाल बजाज से विवाह के पश्चात समाजसेवा की ओर अग्रसर हुआ। वर्धा, महाराष्ट्र में बसने के बाद वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम से सक्रिय रूप से जुड़ीं। उन्होंने महिला शिक्षा, सामाजिक समानता, पशु कल्याण और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया। आचार्य विनोबा भावे के साथ भूदान आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका रही और वे अखिल भारतीय गोसेवा संघ की अध्यक्ष भी रहीं।
1956 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित की गईं जानकीदेवी बजाज, अपने समस्त सम्मान और उपलब्धियों के बावजूद आजीवन विनम्रता और सेवा की प्रतीक बनी रहीं। उनकी आत्मकथा *“मेरी जीवन यात्रा”* उनके अनुशासित, सादे और मूल्य-आधारित जीवन का सशक्त दस्तावेज है।
आज जब राष्ट्र उनकी विरासत को स्मरण कर रहा है, तब उनके पौत्र श्री शिशिर बजाज के मार्गदर्शन में और परपौत्र श्री कुशाग्र बजाज के नेतृत्व में बजाज समूह ने एक भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की है, जो उनके आदर्शों और राष्ट्रनिर्माण में योगदान को उजागर करता है।