शिक्षा में मौलिक सुधारों पर मंथन कर रहे देशभर से आए शासन और शिक्षा जगत के दिग्गज- राजस्थान ज्ञान सभा
जयपुर, दिव्यराष्ट्र/ राजस्थान के शैक्षणिक भविष्य को एक नई परिभाषा देने और राज्य की समृद्ध ज्ञान विरासत को आधुनिकता से जोड़ने के उद्देश्य से, जेईसीआरसी विश्वविद्यालय में दो दिवसीय ‘राजस्थान ज्ञान सभा’ का आगाज़ हुआ। यह विशेष समागम राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग, आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के साझा संकल्प का परिणाम है। जहाँ विद्वानों का बौद्धिक मंथन केवल चर्चा तक सीमित नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव की नींव रख रहा है।
इस सभा के उद्घाटन सत्र में पारंपरिक विषयों से हटकर ‘शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग’, ‘मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा’ और ‘पर्यावरण संरक्षण हेतु जीवनशैली में बदलाव’ जैसे आधुनिक विषयों पर गहन विमर्श किया गया।
अपने विचार साझा करते हुए, सुनीलभाई मेहता (अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख, आरएसएस) ने शिक्षा में वैचारिक स्वतंत्रता और मौलिक शोध को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे भारत पुनः ‘विश्व गुरु’ के पद पर आसीन हो सके।
शिक्षा को साक्षरता के साथ राष्ट्रीयता का आधार बताते हुए शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने नीति से अधिक परिपालन पर ज़ोर देते हुए कहा कि स्थानीय परिवेश और सांस्कृतिक मूल्यों को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाना ही वास्तविक सुधार है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनाने का मार्गदर्शक बताते हुए रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ (पूर्व शिक्षा मंत्री, भारत सरकार) ने बताया की हमारा उद्देश्य एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करना है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो, लेकिन जिसकी जड़ें भारतीय मूल्यों और संस्कृति में गहरी जमी हों। उनके अनुसार, मातृभाषा में शिक्षा और अनुसंधान पर ज़ोर देना हमारे युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य है।
तो वहीं, डॉ. अतुल कोठारी (राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास) ने ‘चरित्र निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ का विज़न साझा किया व बताया कि शिक्षा का भारतीयकरण ही समाज की वर्तमान विसंगतियों का एकमात्र समाधान है।
राजस्थान को एक ‘नॉलेज हब’ के रूप में विकसित करने की सोच को बढ़ावा देने के लिए ओपी बैरवा (आईएएस, आयुक्त कॉलेज शिक्षा, राजस्थान) ने शिक्षा को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर कौशल और रोजगार से जोड़ने पर बल दिया। व बताया कि शासन और शिक्षण संस्थानों के बीच हो रही यह सभा, प्रदेश के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेगी और ‘विकसित राजस्थान’ के संकल्प को गति देगी।
इसी कड़ी में, जेईसीआरसी विश्वविद्यालय के वाईस चेयरपर्सन अमित अग्रवाल ने संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराते हुए नवाचार और उद्यमिता के उन नए आयामों पर प्रकाश डाला जो राजस्थान को एक ग्लोबल एजुकेशन हब बनाने की दिशा में उठाए जा रहे हैं।
जेईसीआरसी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विक्टर गंभीर ने तकनीकी शिक्षा में ‘आउटकम-बेस्ड लर्निंग’ का आह्वान करते हुए डिजिटल युग में ‘संस्कारयुक्त कौशल’ की महत्ता बताई। उन्होंने भविष्य के लिए एआई और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश को आवश्यक बताया।
यह आयोजन राजस्थान की शैक्षणिक दिशा को एक नई ऊंचाई प्रदान करने की ओर अग्रसर है। जहाँ परंपरा और तकनीक के अनूठे संगम पे नए प्रयोग व विचार, विद्वानों द्वारा साझा किये जा रहे हैं।