(डॉ. सीमा दाधीच, प्रधान संपादक दिव्यराष्ट्र)
समस्त भारत वासी आज नवसंवत्सर मना रहे हैं इसे हिंदू नव वर्ष के रूप में भी जाना जाता है। दिव्यराष्ट्र के सभी पाठकों को नवसंवत्सर एवं राजस्थान स्थापना दिवस की कोटि-कोटि बधाई। नव संवत्सर सभी देशवासियों के लिए मंगलमय हो। आज हम राजस्थान राज्य के स्थापना दिवस को भी मना रहे है राजस्थान ने लोकतंत्र स्थापित होने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की है। यह राजस्थान की शान मारवाड़ियों के साहस की गाथा का इतिहास है।राजस्थान अपनी समृद्ध संस्कृति विरासत, किले और जीवंत परंपराओं के लिए जाना जाता है जो अपनी कलात्मकता का अद्भुत मिश्रण है, राजस्थान की गौरव गाथा में योद्धाओं ऐतिहासिक शासन को, लोक देवी-देवताओ का अद्भुत संयम रहा है। राजस्थान दिवस मुख्य रूप से हर साल 30 मार्च को मनाया जाता है,क्योंकि 30 मार्च 1949 को जयपुर, जोधपुर,जैसलमेर और बीकानेर रियासतों के विलय से ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ का गठन हुआ था। हमारे राजस्थान के मुख्यमंत्री ने पिछले साल से राजस्थान दिवस को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (नववर्ष) के दिन मनाया जाने का निर्णय लिया जिसका सभी ने सम्मान किया। यह दिन राजस्थान के एकीकरण और अपनी गौरवशाली विरासत व संस्कृति के उत्सव का प्रतीक है। यह दिन राजस्थान की संस्कृति, वीरता और परंपरा को सलाम करने का दिन है,जो क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है यहां हर जिले में भाषा में बदलाव आता है जो वहां के विरासत और वहां के संस्कृति सभ्यता संस्कार को भी बताता है। राजस्थान स्थापना दिवस के साथ हम अब नव संवत्सर /हिंदू नव वर्ष का स्वागत भी साथ करेंगे, यह वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है। यह आमतौर पर मार्च या अप्रैल में पड़ता है और विक्रम संवत वर्ष की शुरुआत,वसंत ऋतु के आगमन और वसंत नवरात्रि उत्सव का प्रतीक है। नव वर्ष के दिन ही भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए भी सभी हिंदू धर्म के लोग इस वर्ष का स्वागत धार्मिक कार्य के रूप से करते हैं नवसंवत्सर को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा ,आंध्र प्रदेश/कर्नाटक में उगादी, सिंधियों के लिए चेटी चंड़ और कश्मीर में नवरेह के नाम से जाना जाता है । लोग घरों के बाहर रंगोली बनाकर,पीले झंडे (गुड़ी) बांधकर और आने वाले वर्ष में समृद्धि की कामना करके इस पर्व को मनाते हैं। यह नौ दिवसीय चैत्र नवरात्रि उत्सव की शुरुआत माता रानी की पूजा अर्चना से प्रारंभ करते है। किसी भी शुभ कार्य के पहले देवी पूजन का विधान है यह हमारे देश में नारी के प्रति आदर,समर्पण के भाव को बताता है। नवरात्रि केवल देवी उपासना नहीं, बल्कि नारी शक्ति और सम्मान का महापर्व है। यह महिलाओं के लिए आत्मरक्षा,शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए समर्पित होने के साथ पिछड़े क्षेत्रों में जागरूक करने का पर्व है। सरकार अपनी नीतियों से देश की नारी शक्ति को सशक्त बनाने का भरसक प्रयास कर रही है।