– सतयुग के पश्चात कलयुग का पहला शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ
– 8 मार्च से 19 अप्रैल तक 43 दिवसीय महाअनुष्ठान, देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान
पुष्कर के इतिहास का सबसे बड़ा महायज्ञ
पुष्कर दिव्यराष्ट्र। तीर्थों के तीर्थ, तीर्थगुरु पुष्करराज की पावन धरा एक बार फिर वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान होने जा रही है। 8 मार्च से 19 अप्रैल तक यहां 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन होगा। बताते है कि सतयुग में महर्षि विश्वामित्र द्वारा सम्पन्न महायज्ञ के उपरांत कलयुग में इस स्वरूप का यह प्रथम महाअनुष्ठान है, जो अनन्त विभूषित महामंडलेश्वर परम स्वामी प्रखर महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न होगा। इस आयोजन को पुष्कर को पुनः राष्ट्रीय आध्यात्मिक चेतना के केंद्र में प्रतिष्ठित करने की एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। स्वामी प्रखर महाराज के अनुसार, “सतयुग में ऐसे महायज्ञ से नवसृष्टि का सूत्रपात हुआ था, किंतु वर्तमान आयोजन का उद्देश्य नई सृष्टि की रचना नहीं, बल्कि विश्व में व्याप्त आतंक, भय, असंतुलन और सांस्कृतिक संकटों के शमन हेतु सामूहिक आध्यात्मिक ऊर्जा का जागरण करना है।”
महाराज श्री को विश्वास है कि पूर्णाहुति के उपरांत यह महायज्ञ सकारात्मक परिवर्तन का सूत्रपात करेगा और पुष्कर पुनः देश ही नहीं पूरी दुनियां की आध्यात्मिक धुरी के रूप में प्रतिष्ठित होगा।
शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ समिति के मुख्य संयोजक सुशील ओझा एवं अध्यक्ष राधेश्याम गुरुजी ने बताया कि विश्वविख्यात ब्रह्मा मंदिर पुष्कर की नगरी में आयोजित यह 43 दिवसीय अनुष्ठान केवल धार्मिक कार्यक्रम भर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अस्मिता को सुदृढ़ करने का एक व्यापक आध्यात्मिक अभियान है।
संचालन मंडल के सदस्य नवीन शर्मा के अनुसार, हाल ही में बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री द्वारा सम्पन्न हनुमान कथा में तीर्थराज पुष्कर की पवित्रता एवं मर्यादा को बनाए रखने की जो भावनात्मक अपील हुई थी, यह महायज्ञ उसी वातावरण को स्थायित्व और व्यापक आध्यात्मिक विस्तार प्रदान करेगा।
8 मार्च को विराट शोभायात्रा से शुभारंभ
महायज्ञ का शुभारंभ 8 मार्च को अपराह्न 4 बजे भव्य शोभायात्रा से होगा। सैकड़ों महिलाएं ब्रह्म घाट से जल कलश लेकर पुष्कर के मुख्य बाजार से होते हुए यज्ञस्थल तक पहुंचेंगी। वैदिक मंत्र, शंखध्वनि और मंगलगीतों से संपूर्ण नगर आध्यात्मिक आभा में आलोकित होगा। इधर पुष्कर के खेरकड़ी रोड पर चार माह से चल रही महायज्ञ की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
मंत्रजाप और आहुतियों का विराट संकल्प
इस महायज्ञ में 2000 त्रिकाल संध्या करने वाले विद्वान पंडित 24 करोड़ गायत्री मंत्रों का जप करेंगे। इसके साथ 2 करोड़ 40 लाख दशांश एवं 60 लाख सूर्यसूक्त आहुतियों सहित कुल लगभग 3 करोड़ आहुतियों का संकल्प लिया गया है।
इस महाअनुष्ठान में लगभग 40 क्विंटल घी, 25 क्विंटल काले तिल के अतिरिक्त चावल, जौ, शर्करा, विविध हवन औषधियां तथा लगभग 3000 क्विंटल समिधा का उपयोग किया जाएगा, जो नई आध्यात्मिक ऊर्जा का नव संचार करेगा।
80–100 बीघा में भव्य यज्ञनगरी
पुष्कर के खेरकड़ी रोड स्थित लगभग 80 से 100 बीघा क्षेत्र में विस्तृत और भव्य यज्ञनगरी विकसित की गई है। इस पावन स्थल को गायत्री शक्ति पीठ, मणिवेदिका पीठ नाम दिया गया है।
मुख्य यज्ञशाला
– 150×150 फीट की शास्त्रोक्त विधि से निर्मित भव्य यज्ञशाला
– दो हाथ गहरी 200 यज्ञ वेदियां
– 200 यजमान, विद्वान आचार्यों के सान्निध्य में 43 दिवस तक नियमित हवन करेंगे।
– प्रत्येक वेदी में लगभग 1.5 लाख आहुतियां देने की क्षमता
मंत्रजप कक्ष
– 50×50 एवं 60×60 फीट के कुल 9 मंत्रजप कक्ष
– प्रतिदिन लगभग 60 लाख मंत्रजाप का लक्ष्य
दैनिक समय-सारिणी
– प्रातः 6:00 से 12:00 बजे तक मंत्रजाप
– सायं 4:00 से 7:00 बजे तक आहुतियां