पीएंडजी शिक्षा , अपनी पहल के माध्यम से 1 करोड़ बच्चों को सकारात्मक रुप से प्रभावित कर रही है
मुंबई , दिव्यराष्ट्र:/ पीएंडजी शिक्षा, ने कल भारत भर में 1 करोड़ बच्चों तक पहुंचने और उनके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने की उपलब्धि की घोषणा की, जिसका उद्देश्य सीखने के अंतर को मिटाना है। यह उपलब्धि देश भर में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को सशक्त बनाने के लिए दो दशकों से अधिक समय से जारी निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
भारत की अनेक कक्षाओं में सीखने के दौरान होने वाली झिझक अक्सर अनदेखी रह जाती है-कोई बच्चा पैराग्राफ पढ़ते हुए रुक जाता है, किसी अवधारणा को लेकर असमंजस में होता है, या हाथ उठाने में संकोच करता है। जब ऐसे क्षण जब लाखों में बदलते है, तो चुनौती का वास्तविक स्वरूप सामने आता है। यह उपलब्धि केवल पहुँच का आँकड़ा नहीं है, बल्कि यह संख्या के पीछे छिपी प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत सीखने की यात्राओं को दर्शाती है – यह सुनिश्चित करती है कि अस्थायी शैक्षणिक अंतराल किसी बच्चे के दीर्घकालिक आत्मविश्वास या संभावनाओं को परिभाषित न करे |
इस उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए पीएंडजी शिक्षा ने हैदराबाद के एक आदिवासी सरकारी स्कूल में एक समारोह का आयोजन किया – ऐसा परिवेश जो वह स्थान दर्शाता है जहाँ उसका कार्य सबसे गहराई से जुड़ा हुआ है। स्थल का चयन उन समुदायों का प्रतीक था जहां सीखने की कमियां अक्सर सबसे पहले सामने आती हैं और जहां संरचित हस्तक्षेप सबसे बड़ा बदलाव ला सकता है।
शिक्षकों, भागीदारों और विशेषज्ञों ने समझ के साथ सीखने के महत्व पर प्रकाश डालने के लिए एक साथ मिलकर काम किया, क्योंकि 1 करोड़ की उपलब्धि की घोषणा के साथ कक्षाओं से जुड़ी वास्तविक कहानियाँ प्रस्तुत की गईं, जिन्होंने कार्यक्रम के ठोस जमीनी प्रभाव को स्पष्ट रुप से दर्शाया।
कार्यक्रम में एक विशेष पैनल चर्चा भी की गई , जिसका संचालन आदर्श रेड्डी (विकास और साझेदारियाँ, शैक्षिक पहल) ने किया। पैनल में प्रणिता सुभाष (भारतीय अभिनेत्री), समीरा रेड्डी (भारतीय अभिनेत्री और सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंसर), प्रणव कोठारी (सीईओ – एजुकेशनल यूनिटेटिव्स) और रजत ब्रार (सीनियर डायरेक्टर – ब्रांड ऑपरेशन्स, पी एंड जी इंडिया) शामिल रहे।
पैनल चर्चा में इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई कि सीखने के अंतराल अक्सर झिझक, संकोच या नकारात्मक लेबल के रूप में सामने आते हैं, जो बच्चों के आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं। इस संदर्भ में प्रारंभिक पहचान, अभिभावकों की जागरूकता तथा निर्णयात्मक दृष्टिकोण के बजाय समय पर प्रोत्साहन के महत्व को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम की एक प्रमुख झलक पीएंडजी शिक्षा और एजुकेशनल यूनिटिएटिव्स के सहयोग से स्थापित एआई बैक्ड ‘ माइंडस्पार्क अनुकूलनशील शिक्षण प्रयोगशाला का प्रदर्शन था, जहाँ उपस्थित अतिथियों ने प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया कि किस प्रकार तकनीक प्रत्येक बच्चे के सीखने के सटीक स्तर की पहचान कर उसके लिए व्यक्तिगत शिक्षण पथ तैयार करती है।