एमएसएमई के लिए कार्यशील पूंजी तक पहुंच बढ़ाना है मकसद
भीलवाड़ा, दिव्यराष्ट्र:/ भीलवाड़ा को ‘वस्त्रनगरी’ के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे महत्वपूर्ण टेक्सटाइल उत्पादन केंद्रों में से एक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना जारी रखे हुए है। इसे शहर के मजबूत एमएसएमई इकोसिस्टम और निर्यात की अच्छी गति का समर्थन प्राप्त है।
भारत का प्रमुख आरबीआई-लाइसेंस प्राप्त ‘ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम’ प्लेटफॉर्म, एम1एक्सचेंज भीलवाड़ा के बढ़ते टेक्सटाइल क्लस्टर की सहायता करना चाहता है। यह प्लेटफॉर्म इनवॉइस डिस्काउंटिंग के जरिए व्यवसायों को तेज और बिना किसी गारंटी (कोलेटरल-फ्री) के कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराता है।
शहर के टेक्सटाइल उद्योग का सालाना टर्नओवर लगभग 25,000 करोड़ रुपये है और यार्न व फैब्रिक का निर्यात करीब 3,800 करोड़ रुपये का है। यह भीलवाड़ा के टेक्सटाइल एमएसएमई के लिए व्यवस्थित और समय पर कार्यशील पूंजी समाधानों का एक बड़ा अवसर पेश करता है। भीलवाड़ा भारत के पॉलिएस्टर फैब्रिक उत्पादन का लगभग 50% हिस्सा बनाता है। यहाँ 850 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जो कॉटन, पॉलिएस्टर, सिल्क और ऊनी कपड़ों का उत्पादन करती हैं।
एम1एक्सचेंज के प्रमोटर एवं डायरेक्टर संदीप मोहिंद्रू ने कहा, “भीलवाड़ा जैसे मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स को ऐसे समाधानों की जरूरत है जो पूरी वैल्यू चेन के लिए काम करें, बड़े टेक्सटाइल कॉर्पोरेट्स से लेकर उनके एमएसएमई सप्लायर्स तक। ट्रेड्स पर ज्यादा कॉर्पोरेट्स को जोड़कर, एम1एक्सचेंज उन्हें कैश फ्लो बेहतर करने, वेंडर के साथ संबंध मजबूत करने और भुगतान अनुशासन में सुधार करने में मदद करता है। वहीं एमएसएमई को बिना किसी गारंटी के जल्दी भुगतान मिल जाता है। इस नकदी (लिक्विडिटी) से छोटे बिजनेस अपनी क्षमता, टेक्नोलॉजी और विस्तार में आत्मविश्वास के साथ निवेश कर पाते हैं। हमारा फोकस राजस्थान में कॉर्पोरेट और एमएसएमई दोनों की भागीदारी बढ़ाना है, ताकि टेक्सटाइल फाइनेंसिंग सिस्टम और ज्यादा कुशल और मजबूत बने।”
एम1एक्सचेंज इस क्षेत्र में एमएसएमई और कॉर्पोरेट की भागीदारी बढ़ाने की योजना बना रहा है, ताकि समय पर और सस्ती लिक्विडिटी आसानी से मिल सके। अब तक एम1एक्सचेंज ने 2,60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की इनवॉइस डिस्काउंटिंग की है। इस प्लेटफॉर्म पर 70,000 से ज्यादा एमएसएमई, 5,000 से ज्यादा कॉर्पोरेट और 70 से ज्यादा बैंक व एनबीएफसी जुड़े हुए हैं। कंपनी मार्च 2026 तक 1,25,000 करोड़ रुपये के थ्रूपुट वैल्यू (प्रोसेस की गई इनवॉइस की कुल वैल्यू) के लक्ष्य के करीब पहुँच गई है, जो वित्त वर्ष 2025 के 78,000 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है।