दिव्यराष्ट्र, जयपुर: भारतीय छात्र अब अपनी वैश्विक शिक्षा की सीमाओं का विस्तार कर रहे हैं। विदेश में पढ़ाई की प्राथमिकताओं में एक स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है, जहाँ छात्र अब पारंपरिक देशों के बजाय स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर, यूएई, न्यूज़ीलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे उभरते शैक्षिक गंतव्यों को तेजी से चुन रहे हैं।
हालांकि, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे अंग्रेज़ी-भाषी देश, खासकर अमेरिका, एसटीईएम (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) पाठ्यक्रमों के लिए अब भी बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन भारतीय छात्र अब सक्रिय रूप से अपने विकल्पों में विविधता ला रहे हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से पढ़ाई की कुल लागत, शिक्षा की गुणवत्ता, लचीले वीज़ा नियमों, इंटर्नशिप, रोजगार के अवसरों और छात्र सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कारकों से प्रेरित है।
जानकारी देते हुए ऑक्सिलो फिनसर्व की सीबीओ (ओवरसीज़ लोन) श्वेता गुरु ने कहा, “आज के भारतीय छात्र विदेश में शिक्षा को लेकर पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यावहारिक और आरओआई (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) केंद्रित दृष्टिकोण अपना रहे हैं। स्पेन, जर्मनी और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों में पढ़ाई की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, क्योंकि ये देश उच्च शैक्षिक गुणवत्ता और किफ़ायती लागत का बेहतरीन तालमेल पेश करते हैं। इसके अलावा, यहाँ की स्पष्ट वीज़ा प्रक्रियाएं और शिक्षा के बाद मिलने वाले बेहतर रोज़गार अवसर—विशेष रूप से स्नातकोत्तर और एसटीईएम कार्यक्रमों के लिए छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं।”
आंकड़े बताते हैं कि 2023 से 2025 के बीच कई गैर-पारंपरिक यूरोपीय देशों ने भारतीय छात्रों की संख्या में निरंतर और उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। अब यह देश केवल बैकअप विकल्प नहीं रहे, बल्कि भारतीय छात्र इन्हें अपनी ‘पहली पसंद’ के रूप में तेज़ी से स्वीकार कर रहे हैं।
सुश्री गुरु ने आगे कहा, “उभरते गंतव्य अब पारंपरिक बाज़ारों की तुलना में लगभग आधी लागत पर वैश्विक स्तर के स्नातकोत्तर और एसटीईएम परिणाम दे रहे हैं। साथ ही, यहाँ वीज़ा जोखिम कम है और निवेश पर रिटर्न भी तेज़ मिलता है।”
विदेश में पढ़ाई का यह बदलता स्वरूप अब अधिक परिपक्व और शोध-आधारित निर्णय प्रक्रिया की ओर इशारा करता है। यहाँ उभरते देश अब केवल ‘बैकअप’ नहीं, बल्कि भारतीय छात्रों के एक बड़े वर्ग के लिए रणनीतिक तौर पर पहली पसंद बन गए हैं।
सुश्री गुरु ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि यह रुझान 2026 में और भी अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगा।”
ऑक्सिलो ट्यूशन फीस, यात्रा, आवास, लैपटॉप और अध्ययन सामग्री से लेकर जीवन-यापन के खर्चों तक—शिक्षा से जुड़े हर संभावित व्यय के लिए संपूर्ण वित्तीय समाधान प्रदान करता है। अब तक, ऑक्सिलो ने दुनिया भर के 25 से अधिक देशों के 1,600 से अधिक विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे 15,000 से ज्यादा छात्रों को शिक्षा वित्तपोषण उपलब्ध कराकर उनके सपनों को साकार किया है।