आधे से अधिक ने इन-बिल्ट क्रेडिट विकल्पों को ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान दी प्राथमिकता
जयपुर, दिव्यराष्ट्र*अग्रणी उपभोक्ता वित्त कंपनी, होम क्रेडिट इंडिया ने आज अपने प्रमुख वार्षिक स्टडी “हाउ इंडिया बारोज़” (एचआईबी) का 7वां संस्करण जारी किया। यह स्टडी भारत के निम्न-मध्यम वर्ग के ऋण लेने के व्यवहार में एक गहन बदलाव को उजागर करता है, जो लगभग दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और अक्सर इसे आर्थिक विकास का मौन चालक माना जाता है।
इस वर्ष की स्टडी इस वर्ग के बीच ऋण लेने के व्यवहार और दृष्टिकोण में एक स्पष्ट परिवर्तन दिखाता है—आवश्यकता के लिए सुरक्षा जाल के रूप में क्रेडिट से हटकर, अब यह आकांक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए एक उत्प्रेरक बन गया है। क्रेडिट का उपयोग तेजी से जीवन स्तर को ऊपर उठाने, उद्यमशीलता के प्रयासों में निवेश करने और दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है, जो उनकी रणनीतिक और दूरंदेशी मानसिकता को दर्शाता है। यह स्टडी ऋण लेने के व्यवहार, डिजिटल स्वीकार्यता, ऋण निर्णय के चालकों, वित्तीय आकांक्षाओं और दृष्टिकोणों में गहन अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जिससे पता चलता है कि भारत का उभरता मध्यम वर्ग अपनी आकांक्षाओं को निधि देने और सपनों को वास्तविकता में बदलने के लिए स्मार्ट क्रेडिट का लाभ एक उपकरण के रूप में कैसे उठा रहा है।
एचआईबी 7.0 को चार विषयगत स्तंभों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है जो विकास के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में स्मार्ट क्रेडिट की अवधारणा को परिभाषित करते हैं:
• पहला क्रेडिट-आकांक्षा संबंध: प्रेरणा और गतिशीलता: यह बताता है कि क्रेडिट व्यक्तिगत और व्यावसायिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक लॉन्चपैड के रूप में कैसे कार्य करता है, ऋण लेने वालों को उनके भविष्य की योजना बनाने और उसमें निवेश करने के लिए सशक्त बनाता है।
• दूसरा डिजिटल ऋण परिदृश्य: चैनल और साक्षरता: यह डिजिटल दक्षता के तीव्र उदय और मोबाइल-फर्स्ट ऋण आवेदनों की ओर बदलाव की जाँच करता है, जो ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं के साथ बढ़ती सहजता को दर्शाता है।
• तीसरा ऋण लेने वाले के फैसलों की डिकोडिंग: मानदंड और समझौते: यह उन प्रमुख कारकों को उजागर करता है जो आधुनिक ऋण लेने वाले के विकल्पों को आकार देते हैं, जैसे ब्याज दरें और ईएमआई अफोर्ड करने से लेकर पारदर्शिता और ऋणदाता की प्रतिष्ठा तक।
• चौथा विश्वास, पारदर्शिता और उभरता हुआ वित्त: यह डेटा गोपनीयता के आसपास की चिंताओं में गहराई से उतरता है, साथ ही एम्बेडेड फाइनेंस और ईएमआई कार्ड जैसे नवीन समाधानों को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को भी दर्शाता है, जो दिक्कत-रहित, एकीकृत क्रेडिट अनुभवों के एक नए युग का संकेत देता है।
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होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग आफीसर आशीष तिवारी कहते हैं, “हाउ इंडिया बोरोज़ 7.0 अध्ययन भारत की क्रेडिट संस्कृति में एक बदलाव को दर्शाता है – जीवित रहने के लिए उधार लेने से लेकर सफलता के लिए उधार लेने तक।” “जेन ज़ी, मिलेनियल्स, महिलाएं और छोटे शहर डिजिटल ऋण क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं, जो गति, सरलता और निजीकरण को महत्व देते हैं। एम्बेडेड फाइनेंस दिक्कत-रहित ऋण को संचालित कर रहा है, जहां विश्वास, प्रौद्योगिकी और मूल्य अभिसरण होकर भारत के ऋण लेने के तरीके को फिर से परिभाषित कर रहे हैं। निम्न-मध्यम वर्ग अपनी महत्वाकांक्षाओं में तेजी से रणनीतिक हो रहा है, क्रेडिट का उपयोग उद्यमशीलता, घर के स्वामित्व और शिक्षा के लिए एक सेतु के रूप में कर रहा है। होम क्रेडिट इंडिया में, हम उन्हें विवेकपूर्ण योजनाकार और आत्मविश्वासी निर्माता के रूप में देखते हैं। हम अपने ग्राहकों को एक पारदर्शी वित्तीय यात्रा के साथ सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो व्यक्तिगत प्रगति, राष्ट्रीय विकास और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती है, जिससे हर उधारकर्ता की # जिंदगी हिट होती है।”
एचआईबी 7.0 की प्रमुख अंतर्दृष्टियां:
स्मार्ट, सुरक्षित एवं डिजिटली संचालित जयपुर
जयपुर में, ‘हाउ इंडिया बॉरोज़ 7.0’ डिजिटल अपनाने और जिम्मेदारी के साथ ऋण लेने के एक गतिशील मिश्रण को उजागर करता है। शहर के ऋण लेने वाले अधिक आत्मविश्वासी और डिजिटल रूप से साक्षर होते जा रहे हैं, जहाँ ऑनलाइन शॉपिंग 10 आधार अंक बढ़कर 54% हो गई है और इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग 47% तक बढ़ गया है।