मुंबई, दिव्यराष्ट्र*:/ वैश्विक मुद्दे और मीडिया की प्रतिक्रिया’ विषय पर रायटर्स रिज़र्वॉयर इंडिया एवं कम्युनिकेशन टुडे के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय बहुविषयक सम्मेलन का शुभारंभ शनिवार को हुआ। उद्घाटन सत्र में देशभर के प्रमुख शिक्षाविदों, मीडिया विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ सम्मेलन अध्यक्ष प्रो. रुचि गोस्वामी द्वारा सरस्वती वंदना और कुशल संचालन के साथ किया गया, जिसने उद्घाटन सत्र को एक गरिमामय और संस्कारित शुरुआत प्रदान की। इसके बाद अतिथि वक्ताओं का ई-बुके के माध्यम से सम्मान किया गया।
सम्मेलन संयोजक डॉ. आस्था सक्सेना ने स्वागत भाषण देते हुए वैश्विक संचार चुनौतियों, मीडिया नैतिकता तथा सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों पर संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। तत्पश्चात सम्मेलन की एब्स्ट्रैक्ट बुकलेट का औपचारिक विमोचन किया गया।
मुख्य संरक्षक प्रो. संजीव भानावत ने विषय-प्रस्तुति देते हुए बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य में मीडिया की भूमिका, संकट-प्रबंधन तथा जन-जागरूकता में मीडिया की जिम्मेदारियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मीडिया अब केवल घटनाओं का प्रतिबिंब नहीं, बल्कि समाज की दिशा निर्धारित करने वाला सशक्त माध्यम बन चुका है। प्रो. भानावत ने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए यह भी बताया कि वैश्विक चुनौतियों को स्थानीय संदर्भों से जोड़कर देखने की क्षमता ही मीडिया शोध और शिक्षण को अर्थपूर्ण बनाती है।
मुख्य वक्ता प्रो. के. जी. सुरेश, निदेशक, इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में वैश्विक से स्थानीय मुद्दों तक मीडिया की सक्रिय भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि आज मीडिया न केवल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों को प्रमुखता से उजागर कर रही है, बल्कि स्थानीय समस्याओं और जन-सरोकार के मुद्दों को भी प्रभावी ढंग से उठा रही है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. नवीन चन्द्र लोहानी, कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी ने वैश्विक मीडिया चुनौतियों का सामना करने तथा नैतिक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए संगठित शैक्षणिक प्रयासों का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. राजीव कुमार पांडा, डीन, स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, केआईआईटी (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), भुवनेश्वर ने गलत सूचना के दौर में मीडिया की सामाजिक जवाबदेही और उसकी बदलती भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने यह भी कहा कि आज के वैश्विक युग में मीडिया विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के लिए आवश्यक है कि वे भारतीय ज्ञान तंत्र की जड़ों को समझते हुए आधुनिक संचार प्रणालियों में उसका समावेश करें, जिससे मीडिया अधिक संवेदनशील, जिम्मेदार और समाज-केंद्रित बन सके।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. नवीन चन्द्र लोहानी, कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी ने वैश्विक मीडिया चुनौतियों का सामना करने तथा नैतिक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए संगठित शैक्षणिक प्रयासों का आह्वान किया। दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न सत्रों में कुल 80 शोध-पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं और देश के विभिन्न कोनों से शिक्षाविद एवं शोधार्थी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। डॉ. अदिति पारीक ने धन्यवाद देते हुए सभी आमंत्रितों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। सम्मेलन का दूसरा दिन, 30 नवम्बर को, वैश्विक संचार, डिजिटल मीडिया डायनेमिक्स, सांस्कृतिक विमर्श तथा अंतर्विषयक शोध पर आधारित विभिन्न तकनीकी सत्रों के साथ जारी रहेगा।