जयपुर, दिव्यराष्ट्र । भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ( बीएमसीएचआरसी) एवं इंडियन मस्क्यूलोस्केलेटल ऑन्कोलॉजी सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय आईएमएसओएस 2026 – बीएमकॉन कॉन्फ्रेंस का समापन रविवार को सफलतापूर्वक हुआ। देश-विदेश से आए विशेषज्ञों की उपस्थिति में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन हड्डियों के कैंसर से जुड़े आधुनिक उपचार, नई तकनीकों और चिकित्सकीय अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन मैलिग्नेंट बोन ट्यूमर – अतीत, वर्तमान और भविष्य विषय पर विशेषज्ञों ने विस्तृत विचार साझा किए। इस सत्र में बोन कैंसर के उपचार में पिछले वर्षों में हुए बदलाव, वर्तमान में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इसके साथ ही बोन सारकोमा के सर्जिकल मैनेजमेंट में 3-डी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स और नेविगेशन तकनीक के उपयोग पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि इन अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बन रही है, जिससे मरीजों के उपचार परिणाम बेहतर हो रहे हैं।
कॉन्फ्रेंस के दौरान रीजनल एनेस्थीसिया वर्कशॉप भी आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस वर्कशॉप में एनेस्थीसिया से जुड़ी आधुनिक विधियों और उनके सुरक्षित उपयोग के बारे में विस्तार से बताया गया, जिससे चिकित्सकों को अपने क्लिनिकल अभ्यास में इन तकनीकों को अपनाने में मदद मिल सके।
कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र में आयोजित एक्सपीरियंस शेयरिंग सेशन में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान डॉ. मनीष अग्रवाल ने अच्छी क्लिनिकल प्रैक्टिस की स्थापना पर अपने विचार रखे और बताया कि मरीजों के बेहतर उपचार के लिए चिकित्सकों को लगातार सीखने और नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। वहीं डॉ. अजय पुरी ने एकेडमिक एक्सीलेंस – वहां तक कैसे पहुंचे विषय पर अपने अनुभव साझा किए और चिकित्सा क्षेत्र में शोध एवं शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसी सत्र में डॉ. फिलिप पी. टी. फुनोविक्स ने लीगेसी को जारी रखना – द वियना स्टोरी विषय पर अपने संस्थान की यात्रा और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी, जबकि डॉ. आशीष गुलिया ने वर्क-लाइफ बैलेंस – मिथक या हकीकत विषय पर चर्चा करते हुए चिकित्सकों के व्यस्त जीवन में संतुलन बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया।
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अरविन्द ठाकुरिया ने बताया कि तीन दिनों तक चली इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में कुल 14 वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 44 आमंत्रित विशेषज्ञ वक्ताओं ने भाग लिया। इसके अलावा 150 से अधिक फैकल्टी और 400 से अधिक प्रतिभागियों ने कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेते हुए अपने अनुभव साझा किए और मस्क्यूलोस्केलेटल कैंसर के नवीनतम उपचार तरीकों पर चर्चा की।
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. प्रवीण गुप्ता द्वारा विकसित कॉस्ट-इफेक्टिव इनोवेटिव टेक्निक्स विषय पर व्याख्यान दिया गया। उन्होंने लिम्ब पुनर्निर्माण (हाथ-पैर की हड्डियों के पुनर्निर्माण) के लिए अपनी विकसित किफायती तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन इनोवेटिव तकनीकों के माध्यम से कम लागत में भी हड्डियों का पुनर्निर्माण संभव है, जिससे मरीजों को बेहतर और प्रभावी उपचार परिणाम मिल सकते हैं। साथ ही उन्होंने अपने क्लिनिकल अनुभव भी प्रतिभागियों के साथ साझा किए।
कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन आयोजित एक सत्र में डॉ. अजय पुरी ने बताया कि कैंसर की पहचान के लिए की जाने वाली बायोप्सी में पारंपरिक ओपन बायोप्सी की तुलना में नीडल बायोप्सी को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के उपयोग से संक्रमण का जोखिम कम होता है और मरीज के लिए प्रक्रिया अधिक सुरक्षित होती है। वहीं डॉ. मनीष अग्रवाल ने भारतीय स्तर पर विकसित किए जा रहे इंडियन इम्प्लांट्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये इम्प्लांट्स मरीजों के लिए किफायती और प्रभावी विकल्प साबित हो रहे हैं।
इस प्रकार आईएमएसओएस 2026 – बीएमकॉन कॉन्फ्रेंस ने देश-विदेश के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां आधुनिक शोध, नवीन तकनीकों और चिकित्सकीय अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से हड्डियों के कैंसर के उपचार को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा हुई।