– मां गायत्री के तीन स्वरूप, सप्तऋषि व आदि शंकराचार्य की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा
– 2000 विप्र साधकों ने शुरू किया मंत्र जाप
पुष्कर, दिव्यराष्ट्र:/ तीर्थराज पुष्कर की तलहटी में चल रहे 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को अरणी मंथन से प्रधान कुंड पर अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। इसी के साथ महायज्ञ में अब मंगलवार से सभी हवन कुंडों में यज्ञाचार्यों के निर्देशन में आहुतियां देने का क्रम प्रारंभ हो जायेगा।
इससे पूर्व महायज्ञ स्थल पर मां गायत्री के तीन स्वरूप, सप्तऋषि और आदि शंकराचार्य की मूर्ति की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई। महायज्ञ के प्रमुख सूत्रधार स्वामी प्रखर जी महाराज तथा महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर विशोकानंद जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मुख्य यजमान तिलकराज शर्मा (कानपुर) रहे।
इस दौरान करीब 200 यजमान दंपतियों ने यज्ञ वेदी पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवी-देवताओं का आव्हान कर उन्हें आमंत्रित किया।
इधर यज्ञ स्थल पर नव निर्मित छह पाठशालाओं में सोमवार से लगभग 2000 विप्र बटुकों ने मां गायत्री के मंत्र जाप का अनुष्ठान प्रारंभ कर दिया। ये साधक प्रतिदिन लगभग 60 लाख से अधिक गायत्री मंत्रों का जाप करेंगे।
शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ आयोजन समिति के मुख्य प्रवक्ता अशोक जोशी ने बताया कि करपात्री जी महाराज के प्रमुख शिष्य स्वामी प्रखर जी महाराज के सान्निध्य में यह महायज्ञ आतंकवाद के खात्मे, विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना के साथ आयोजित किया जा रहा है। महायज्ञ में आहुतियों और मंत्र जाप का यह क्रम 19 अप्रैल को होने वाली पूर्णाहुति तक जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि महायज्ञ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है तथा श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की भी व्यवस्था की गई है। उल्लेखनीय है कि 43 दिवसीय इस शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का शुभारंभ रविवार को निकली भव्य कलश एवं शोभायात्रा के साथ हुआ था। प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट और विप्र फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महायज्ञ में कुल 27 करोड़ गायत्री मंत्रों के जाप का संकल्प लिया गया है।