ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आज से
जयपुर, दिव्यराष्ट्र*तेजी से बढ़ रही आँखों से सम्बंधित बीमारियों के इलाज और नवीनतम रिसर्च की जानकारी साझा करने के लिए जयपुर में देश विदेश से आठ हजार से अधिक विशेषज्ञ आज जुटने जा रहे हैं। मौका होगा ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की 84वीं एनुअल कॉन्फ्रेंस एआईओसी 2026 का। सीतापुरा स्थित जेईसीसी में 12 से 15 मार्च तक आयोजित होने वाली इस कॉन्फ्रेंस में आंखों की बीमारियों और उसके इलाज के हर पहलू पर विशेषज्ञ विचार विमर्श करेंगे। बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजकों ने कॉन्फ्रेंस से जुड़ी जानकारी साझा की।
कॉन्फ्रेंस में पहले दिन बनेगा वर्ल्ड रिकॉर्ड, मुख्यमंत्री करेंगे शिरकत –
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के पहले ही दिन एक गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी कायम किया जाएगा जिसमें फलों को रखकर एक वाक्य ‘हेल्दी आईज, हैप्पी लाइफ’ लिखा जाएगा। इसमें अलग अलग तरह के फल क्रम से रखे जाएंगे जिसमें आखिरी फल मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रखेंगे। डॉ. मुकेश ने बताया कि यह आई केयर प्रोफेशनल्स की दुनिया की सबसे बड़ी एकेडमिक मीटिंग्स में से एक है। ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ. वीरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि इस चार दिवसीय समागम में भारत सहित विदेशों से लगभग आठ हजार से अधिक नेत्र रोग विशेषज्ञ, शोधकर्ता और इंडस्ट्री लीडर्स हिस्सा लेंगे। राजस्थान ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी के सहयोग से आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम चिकित्सा जगत में ज्ञान के आदान-प्रदान और नई तकनीकों को साझा करने का एक बड़ा मंच बनेगा।
नवीनतम तकनीक और इनोवेशन का होगा संगम*–
साइंटिफिक कमेटी की चेयरपर्सन डॉ. नम्रता शर्मा के अनुसार, कॉन्फ्रेंस का मुख्य फोकस ऑप्थल्मोलॉजी की पूरी रेंज पर रहेगा। इसमें मोतियाबिंद, रेटिना, कॉर्निया और ग्लूकोमा की आधुनिक सर्जिकल तकनीकें, पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजी, न्यूरो-ऑप्थल्मोलॉजी और ऑक्यूलर ऑन्कोलॉजी पर जैसे कई विषयों पर सेशन रखे जाएंगे।
विजनरी लीडरशिप का संदेश –
सोसाइटी के प्रेसिडेंट डॉ. पार्थ बिस्वास और प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ. जीवन एस. टिटियाल ने कहा कि जयपुर कॉन्फ्रेंस न केवल अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत और दुनिया भर में उच्च गुणवत्ता वाली आई केयर सुनिश्चित करने के हमारे संकल्प को भी मजबूत करेगी। वहीं, ऑनरेरी सेक्रेटरी डॉ. संतोष जी. होनावर ने इसे ऑप्थैल्मिक साइंस और टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलावों को समझने का शानदार मौका बताया।