शिशु हृदय रोग एवं कार्डियक सर्जरी का सफल संचालन
जयपुर, दिव्यराष्ट्र/ हृदय रोग के उन्नत उपचार के लिए मंगलमप्लस मेडिसिटी हॉस्पिटल में हृदय रोग विभाग का विस्तार किया गया है। इस विस्तार के तहत राजस्थान के अनुभवी शिशु हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिमन्यु उप्पल (बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजिस्ट) एवं डॉ. विनोद गुप्ता (कार्डियक सर्जन) ने अपनी सेवाएं प्रारंभ की हैं। यह सेंटर अब समर्पित केयर सिस्टम (360-डिग्री कार्डियोलॉजी) के साथ हृदय रोग उपचार में नए मानक स्थापित कर रहा है।
गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अस्पताल के हृदय रोग विभाग के चेयरमैन डॉ. दीपेंद्र भटनागर ने बताया कि मंगलमप्लस मेडिसिटी हॉस्पिटल अब राजस्थान के अग्रणी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स में शामिल हो चुका है। यहां उत्तर भारत की उत्कृष्ट कैथ लैब उपलब्ध है, जहां हृदय रोगों के उपचार हेतु अत्याधुनिक उपकरण जैसे लेजर ( ईएलसीए), रोटा प्रो, ओसीटी , आईवीयूएस , एफ एफआर और आईवीएल उपलब्ध हैं।
डॉ. अभिमन्यु उप्पल (बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजिस्ट) ने बताया कि यहां नवजात एवं बच्चों के जटिल हृदय रोगों का उपचार एडवांस इंटरवेंशनल तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रूप से किया जाता है। साथ ही, विशेषज्ञ टीम द्वारा समर्पित देखभाल, एनआईसीयू एवं पीडियाट्रिक कार्डियक सपोर्ट सिस्टम की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
डॉ. विनोद गुप्ता (कार्डियक सर्जन) के अनुसार यहां संपूर्ण कार्डियक सर्जरी सेवाएं (एडल्ट एवं पीडियाट्रिक) उपलब्ध हैं।
डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि यहां 24×7 क्रिटिकल केयर सुविधाएं उपलब्ध हैं, साथ ही टीएवीआई, आईसीडी , सीआरटीडी जैसी उन्नत सेवाएं भी प्रदान की जा रही हैं।
हृदय की धड़कन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए अत्याधुनिक पेसमेकर इंप्लांट की सुविधा भी उपलब्ध है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नरेंद्र कुमार बैरवा ने बताया कि हाल ही में अस्पताल में एक अत्याधुनिक लीडलेस पेसमेकर (एएआई – एट्रियल, राजस्थान में प्रथम ) सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया ( जिस दौरान डॉ. जीतेन्द्र मक्कड़ भी उपस्थित रहे )
डॉ. प्रतीक शर्मा (कार्डियक एनेस्थेटिस्ट) के अनुसार पीडियाट्रिक एवं एडल्ट कार्डियक सर्जरी तथा कैथ लैब प्रक्रियाओं के लिए एडवांस्ड एनेस्थीसिया सेवाएं उपलब्ध हैं।
मंगलम ग्रुप के चेयरमैन एन.के. गुप्ता के अनुसार हमारा उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोगों को समय पर और विश्वस्तरीय हृदय उपचार उपलब्ध कराया जा सके, जिससे हार्ट अटैक, क्रोनिक कोरोनरी आर्टरी डिजीज तथा सडन कार्डियक डेथ (हृदयाघात से अचानक मृत्यु) जैसी गंभीर समस्याओं में कमी लाई जा सके।