दिव्यराष्ट्र, मुंबई: एचडीएफसी बैंक की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता ने कहा है कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह बजट घरेलू विकास और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए एक मध्यम-अवधि रोडमैप तैयार करने पर केंद्रित है। पिछले बजट के विपरीत, जिसमें आयकर युक्तिकरण के ज़रिए उपभोग को बढ़ावा देने पर जोर था, इस बार बजट का फोकस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को प्रोत्साहित करने पर रहा है।
‘विकसित भारत’ लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंकिंग प्रणाली हेतु एक स्थायी समिति की स्थापना, तथा पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान, वैश्विक सेवाओं में भारतीय सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी को 10% तक बढ़ाने पर सरकार के नीति-गत जोर को दर्शाता है।
घरेलू उत्पादन के मोर्चे पर, बुनियादी ढांचा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मैग्नेट और रसायन क्षेत्रों को वित्त मंत्री के ‘विकसित भारत’ विज़न में प्रमुखता दी गई है। इसके अलावा, श्रम-प्रधान और टैरिफ से प्रभावित क्षेत्रों जैसे वस्त्र उद्योग और एमएसएमई को भी अधिक नीतिगत समर्थन प्रदान किया गया है।
राजकोषीय गणित की बात करें तो बजट सतर्क रुख अपनाता दिखता है, जिसमें वित्त वर्ष 27 के लिए 10% नाममात्र जीडीपी वृद्धि का अनुमान रखा गया है, जो हमारे 10.5% के अनुमान से कम है। पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लक्ष्य में सरकार ने अपेक्षा के अनुरूप वित्त वर्ष 27 में 11.5% की मध्यम वृद्धि का लक्ष्य रखा है, साथ ही निजी पूंजी को आकर्षित करने पर भरोसा जताया है। कुल मिलाकर राजकोषीय गणित विश्वसनीय और विवेकपूर्ण प्रतीत होता है तथा वित्त वर्ष 27 के लिए क्रमिक राजकोषीय समेकन का संकेत देता है।
हालांकि, 17.2 लाख करोड़ रुपये की अपेक्षा से अधिक सकल उधारी बाजार भावनाओं पर दबाव डाल सकती है, क्योंकि मांग-आपूर्ति के असंतुलन का असर पहले से ही बॉन्ड यील्ड पर दिख रहा है। हमें उम्मीद है कि 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड कल ऊँचे स्तर पर खुल सकती है।